मंगलवार, 26 मार्च 2019

नरेश हत्याकांड-पुलिस लापरवाही का शिकार मनीषा

       नरेश हत्याकांड
       पुलिस की लापरवाही का शिकार मनीषा 

कुछ मामले ऐसे होते हैं जिन पर भरोसा करना नामुमकिन सरीखा होता है. इस केस में पुलिस भी असमंजस में फंस गई थी, हत्या के आरोप में जेल भेजने के बाद तफ्तीश में पता चले कि अपने पति की हत्या उसने नहीं बल्कि किसी और ने की थी. अब सवाल यह  था कि जब मनीषा ने हत्या नहीं की थी तो उसने पुलिस के सामने अपने पति की हत्या करने का अपराध स्वीकार क्यों किया.? यदि समय रहते इस केस की जाँच सही दिशा में ना की जाती तो निरपराध होते हुए भी मनीषा को अपने पति की हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सज़ा भुगतनी पड़ती और उसके दोनों बच्चों को अनाथों की तरह बेसहारा जीवन गुज़ारना पड़ता.


रात को सोने के बाद सुबह 6 बजे जगकर मनीषा जैसे ही अपने कमरे से बाहर निकल घर के बरामदे में आई तो चारपाई पर अपने पति नरेश की खून से लथपथ पड़ी लाश देखकर उसकी चीख निकल गई. वह इतना ज़ोर से चीखी थी कि अंदर कमरे में सो रहे उसके दोनों बेटों सहित पड़ोसी भी दौड़कर उसके घर चले आये थे. लाश पर नजर पड़ते ही सबके रौंगटे खड़े हो गये थे. देखते ही देखते वहां गांववालों का जमवाड़ा लग गया. सरपंच अमित भी मौका पर पहुंच गये थे. उन्होंने अपने मोबाईल फोन नम्बर -9812009500 से थाना लाखन माजरा एसएचओ इं सुभाष सिंह के सरकारी फोन नम्बर-7082999128 पर फोन कर नरेश की हत्या की सूचना दी. तब तक मृतक नरेश का 


मृतक नरेश की फाईल फोटो 
भाई गुलाब सिंह भी खबर मिलते वहां पहुंच गया था. आज से 28 वर्ष पहले नरेश के पिता मान सिंह दिल्ली मुण्डका गाँव से अपनी जमीन बेचकर रोहतक के गाँव चांदी आकर बस गये थे. यहाँ मान सिंह की ससुराल थी. मान सिंह ने चांदी गाँव में जमीन खरीदकर अपने बेटों में बराबर बाँट दी थी. उनकी कुल 7 संताने थी जिनमें 4 लडके थे. मान सिंह की मौत के बाद चरों भाई अपनी जमीनों पर खेतीबाड़ी करते थे और गाँव में ही अलग-अलग रहते थे. नरेश के छोटे भाई सुरेश की मौत एक एक्सीडेंट में 10 वर्ष पूर्व हो गई थी बाकी तीनो भाई गाँव में ही थे. हरियाणा में भ्रूण हत्या के कारण हुई गिरावट के चलते प्रदेशवासी अन्य प्रदेशों के जरूरतमंद गरीब परिवारों की लडकियों को पैसे देकर ब्याह लाते है. मृतक नरेश इसी तरह साल 2007 में झाड़खंड निवासी मनीषा के साथ शादी की थी जिसमे से उनके 8 वर्षीय और 5 वर्षीय दो बच्चे थे. शादी के बाद नरेश को शराब की लत लग गई थी, जिसके चलते उसके घर हर समय झगड़ा रहता था. इसके आलावा भी शराब के कारण उसकी कई लोगों से दुश्मनी थी. इसी शराब के चलते ही मनीषा के सम्बन्ध गाँव के हन्नी नामक युवक के साथ बन गये थे जिसका पता मृतक नरेश को भी था.   


मुकदमा दर्ज करते पुलिस अधिकारी 
रेश की हत्या की सूचना मिलते ही इं सुभाष, एएसआई शमशेर सिंह, हवलदार प्रवीन कुमार,सिपाही राजबीर और अशोक के साथ घटनास्थल पर पहुंच गये. लोगों की भीड़ को एक तरफ कर उन्होंने पूरा बरामदा सील कर लाश का मुआयना किया. मृतक नरेश की लाश चारपाई पर रजाई से ढकी हुई थी. रजाई हटाकर देखा गया तो पाया मृतक के पेट और छाती पर गोली लगने से दो बड़े सुराख़ थे जिन में से खून निकल कर चारपाई से बहने के बाद नीचे जमीन पर गिरकर सूख चुका था.घटनास्थल का बारीकी से निरिक्षण किया गया तो मौका से खाली कारतूस के पांच खोल बरामद हुए जिन्हें कब्जे में लिया गया. घटना की सूचना इं सुभाष ने एसपी जशनदीप सिंह रंधावा, डीएसपी महम सज्जन सिंह सहित क्राईम टीम को भी दे दी थी. आला अधिकारीयों ने मौका पर पहुंच कर वहां का मुआयना किया. एफएसएल टीम प्रभारी सरोज दहिया ने वहां से कुछ सबूत इकठ्ठा कर जाँच के लिए भेजे. इं सुभास ने सबसे पहले मृतक की पत्नी मनीषा का ब्यान दर्ज किया. मनीषा ने अपने बयाँ में बताया कि वह अपने दोनों बच्चों के साथ अपने कमरे में सो रही थी, सुबह उठकर जब देखा तो चारपाई पर ....
इं सुभाष ने पड़ोसियों से भी पूछताछ की, पर घोर आश्चर्य की बात यह थी कि हत्यारों ने नरेश को 5 गोलियां मारी थी, और गोलियां चलने की या चीखने-चिल्लाने की आवाज़ किसी ने भी नहीं सुनी थी. मृतक के भाई गुलाब ने नरेश की हत्या का शक उसी गाँव के दो युवकों हरीश उर्फ़ हनी और बग्गा जताया. उसका कहना था कि नरेश और हन्नी में आपसी विवाद था और कुछ दिन पहले भी दोनों का आपस में झगड़ा हुआ था और हन्नी ने नरेश पर चाकू से हमला किया था. गुलाब सिंह और पड़ोसियों के ब्यान से यह बात भी प्रकाश में आई कि मृतक की पत्नी मनीषा का हन्नी से याराना भी था. बहरहाल इं सुभाष ने नरेश के भाई गुलाब सिंह के बयानों पर हत्या का मुकदमा दिनांक- 22-2-2019 को अपराध संख्या-42/19 पर हन्नी और बग्गा के खिलाफ हत्या की धारा- 302 और आर्म्स एक्ट की धारा 25-54-59 के तहत मुकदमा दर्ज कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए रोहतक मेडिकल कालेज भेज दिया. 


मनीषा बेगुनाह होकर भी जेल गई  
स हत्याकांड से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहोल बन गया था वैसे भी बीते कुछ महीनों से हरियाणा का जिला रोहतक अपराध के मामले में सबसे आगे रहा था इस लिए उच्च अधिकारियों ने इस मामले को जल्द से जल्द हल करने के आदेश दिए. इं सुभाष और एएसआई शमशेर सिंह ने मृतक की पत्नी मनीषा और उसके कथित प्रेमी हन्नी की काल डिटेल निकलवाकर चेक की तो घटना वाली रात उन दोनों के बीच काफी बातें हुई थी. संदेह के आधार पर मनीषा को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया. इस बार मनीषा ने बताया कि उसने गोलियां चले की आवाज़ सुनी थी और डर के कारण उसने अपने आपको बच्चों सहित कमरे में बंद कर लिया था. जबकि पहले बयाँ में उसने बताया था कि उसने गोली चलने की आवाज़ नहीं सुनी थी. जब मनीषा से थोड़ी सख्ती बरती गई तो उसने नरेश की हत्या करने का अपराध स्वीकार करते हुए बतया कि हन्नी के साथ मिलकर उसने नरेश की हत्या की थी.और हत्याकांड के बाद भी वह अपने प्रेमी से लगातार मोबाइल पर बात कर रही थी. यही नहीं पुलिस की तमाम तरह की गतिविधियों की सूचना भी प्रेमी को दे रही थी. मनीषा ने बताया कि हन्नी से उसका पिछले करीब आठ साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था, इस बारे में पता चलने पर उसकी दो बार पिटाई भी हो चुकी थी और हत्या से एक दिन पूर्व भी इसी बात को लेकर नरेश ने उसे मारा था, इसके बाद उसने हन्नी के साथ मिलकर नरेश की हत्या की प्लानिंग बनाई थी. साजिश के तहत मनीषा ने वारदात से पहले अपने मकान का लोहे का गेट भी खुला छोड़ दिया था, ताकि बिना किसी शोर के हनी अपने साथी के साथ आराम से अंदर आ सके. नरेश की हत्या के बाद उसी ने ही अपने पति की लाश पर रजाई डाली थी. दिनांक 25 फरवरी को मनीषा को अरेस्ट कर उसे जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया और रिमांड के दौरान मनीषा की निशादेही पर हन्नी और बगा की गिरफ्तारी के लिए छापा मारा गया पर वो फरार हो चुके थे. मनीषा का पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. बाकि फरार आरोपियों की तलाश के साथ –साथ पुलिस ने इस केस की आगे की तफ्तीश भी जारी रखी.
असली हत्यारे, अनिल और अजित 
आगे चलकर नरेश हत्याकांड में एक ऐसा आश्चर्यजनक मोड़ आया जिसने पुलिस तफ्तीश की बड़ी भारी खामियों को उजागर कर धज्जियां उड़ा दी थी., इस मामले को लेकर पुलिस की बड़ी खिल्ली उड़ी. वास्वतिकता का पता चलते जहाँ मामले की तफ्तीश करने वाले पुलिसकर्मीयों के होश उड़ गये, वहीँ इस मामले में उच्च अधिकारीयों को जवाब देना भारी पड़ गया था.
चांदी गांव निवासी नरेश की 21 फरवरी की रात उसके ही घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में मृतक की पत्नी मनीषा को पुलिस ने 26 फरवरी 2019 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. आरोप था कि उसने अपने प्रेमी हनी उर्फ हरीश और उसके साथी बग्गा के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की है. इस केस की जांच में आगे मामले खुलासा हुआ तो पता चला कि नरेश की हत्या उसकी पत्नी मनीषा या उसके प्रेमी ने नहीं की थी, बल्कि यह हत्या मृतक के भतीजे जगबीर ने अपने भाई अजीत उर्फ काला के साथ मिलकर की है.
इस पर पुलिस भी असमंजस में फंस गई थी कि जब मनीषा ने हत्या नहीं की थी तो उसने पुलिस के सामने अपने पति की हत्या करने का अपराध स्वीकार क्यों किया.? यदि समय रहते इस केस की जाँच सही दिशा में ना की जाती तो निरपराध होते हुए भी मनीषा को अपने पति की हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सज़ा भुगतनी पड़ती और उसके दोनों बच्चों को अनाथों की तरह बेसहारा जीवन गुज़ारना पड़ता.
जांच में हुई इस बड़ी खामी को सुधारने के लिए पोलिस ने इस हत्याकांड के असली आरोपियों को पकड़ने की धड़पकड शुरू करने के साथ इस मामले में निर्दोष मनीषा को सलाखों के पीछे से बाहर लाने की कानूनी प्रकिर्या भी शुरू कर दी.  
दरअसल इस मामले की जाँच करते समय पुलिस को मृतक के भतीजे जगबीर पर संदेह हो गया था. जगबीर पुलिस पर इस बात का बार-बार दबाव डाल रहा था कि वे जांच प्रक्रिया जल्दी पूरी कर मामले को खत्म करे. जबकि परिवार के अन्य सदस्य इस मामले में चुप थे. इस कारण पुलिस को उसपर शक हो गया, जब एएसआई शमशेर ने जगबीर के बारे में गांववालों से पूछताछ की और उसके काल डिटेल निकलवाकर भी चेक किये तो पता चला कि जगबीर और उसकी पत्नी संजना अपने भतीजे अजीत के साथ लगातार फोन के सम्पर्क में थे. जबकि गांववालों से यह जानकारी मिली थी कि अजित को जगबीर और उसके परिवार ने छह माह पूर्व अपने सभी रिश्तेनाते तोड़कर जमीन जायदाद से बेदखल कर दिया था. जब दोनों के बीच कोई रिश्ता ही नहीं था तो लगातार फोन करने का तो सवाल ही नहीं उठता था. 
पुलिस तहकीकात 

पुलिस ने जगबीर को गिरफ्तार कर लिया  जबकि उसकी पत्नी संजना को एक दिन पहले 4 मार्च को गिरफ्तार किया गया था. दोनों को कोर्ट में पेश कर जगबीर को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया और उसकी पत्नी संजना को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. वहीं फरार चल रहे आरोपित अजीत और उसके साथी की तलाश में छापेमारी शुरू की गई. पूछताछ में जगबीर ने बताया कि अक्सर उसका चाचा नरेश तथा उसकी पत्नी का उनके परिवार से मामूली सी बात को लेकर झगड़ा करते रहता था, घटना से दस दिन पूर्व भी दोनों परिवारों में झगड़ा हो गया था. दोनों पक्षों ने पुलिस से शिकायत कर दी थी, हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच सुलह हो गई थी, इसके अलावा एक कारण यह भी था कि नरेश की मौत के बाद उसकी सारी जमीन उसकी पत्नी मनीषा और उसके दोनों बच्चों के नाम हो जानी थी. यदि नरेश के बाद उसकी पत्नी और बच्चे ना रहे तो नजदीकी रिश्तेदार होने के नाते नरेश की पूरी जायदात जगबीर के नाम होनी  हो थी, इसी लिए उसने अपने भतीजे अजित के साथ मिलकर नरेश की हत्या की योजना बनाई और नरेश और उसके दोस्त अनिल को 50 हजार रुपये की सुपारी दी थी. अजीत और उसके दोस्त अनिल ने गोली मारकर नरेश की हत्या कर दी और हत्या के बाद बहादुरगढ़ फरार हो गए.
इस मामले के बीच मनीषा इस लिए आ गई थी कि आरोपितों को इस बात का शक था कि हत्या करते हुए मनीषा ने उन्हें देख लिया है, जबकि हकीकत यह थी कि वह अपने प्रेमी हन्नी को मिलने के लिए कमरे से बाहर आंगन में आई थी और उसने नरेश की हत्या होते नहीं देखा था. हां गोलियां चलने की आवाज़ उसने जरुर सुनी थी. अजित और उसके दोस्त को शक होने के बाद  बाद उन्होंने मनीषा को धमकी दी थी कि यदि उसने किसी को कुछ बताया तो दोनों बच्चों समेत उसे भी मौत के घाट उतार दिया जायेगा. अपने बच्चों की जिदगी बचाने के लिए ही उसने खुद स्वीकार कर लिया था कि हत्याकांड को उसने अंजाम दिलाया है. सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस ने अदालत के सामने सच्चाई प्रस्तुत कर अनुरोध किया कि गल्त जाँच के कारण मनीषा इस मामले में निर्दोष है. अदालत ने दिनांक 6 मार्च को मनीषा को मामले से डिस्चार्ज करा जेल से रिहा कर दिया है. इस मामले में लापरवाही करने के आरोप में थाना प्रभारी सुभाष सिंह और एएसआई शमशेर सिंह के खिलाफ विभागीय जाँच के आदेश जारी किये गए है. नरेश हत्याकांड के फरार दोनों आरोपियों अजित और अनिल को भी पुलिस ने 9 मार्च को गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर उन्हें अदालत में पेश कर रिमांड पर ले लिया था. पूछताछ में दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर बताया कि वह मनीषा की भी हत्या करने वाले थे. नरेश की हत्या के लिए उन्होंने बहादुरगढ़ से दो पिस्तौल खरीदे थे. पुलिस पिस्तौल बेचने वालों की भी तलाश कर रही है. अजीत और अनिल का रिमांड खत्म होने के बाद अदालत में पेश कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है.
(पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा का नाट्य रुपान्तरण)
--साहिल कपूर   





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