नशे के कुण्ड में पूजा की बलि
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| बेमौत मरी गई मासूम पूजा |
अचानक एक पड़ोसी की नज़र मनमोहन के कमरे में रखे बेड पर पड़ी तो वह चौंका. बंद बेड पर गद्दे के नीचे से किसी औरत की छोटी के बाल बाहर झांक रहे थे. उसका अनुसरण करते हुए वहां मौजूद सभी लोगों ने उस ओर देखा. और फिर गद्दे को उठाकर बेड को जब खोला गया तो बेड के भीतर का द्रश्य देख एकाएक वहां उपस्थित सभी लोगों के कंठ से चीख निकल गई थी. बेड के भीतर पूजा की लाश पड़ी थी.
मनमोहन
ठाकुर ने अपने घर पहुंच कर घर का मुख्य द्वार खुलवाने के लिए जब डोरबैल बजाना चाहा
तो यह देख कर दंग रह गया कि घर का मुख्य द्वार पहले से ही खुला हुआ था. यह एक
इतेफाक भी हो सकता था. पर कुछ भी रहा हो ऐसा इतेफाक आज से पहले कभी नहीं हुआ था.
मनमोहन
गली नम्बर – 24, बस्ती टोकावली, फिरोजपुर निवासी सुभाष ठाकुर का पुत्र था. मनमोहन
की शादी अरसा 4 साल पूर्व बी1- 5/6, गली नम्बर-3, जनता कालोनी, नीयर मकसूदा.
जालंधर निवासी चानन सिंह राजपूत की पुत्री पूजा के साथ हुई थी. दोनों राजपूत परिवारों
से थे इस लिए दोनों के बीच आपसी प्रेम प्यार था. पूजा के पिता चन्न सिंह आर्मी
फायर ब्रिगेड में मुलाजम थे, उनकी दो ही संताने थी. बेटा विनोद और बेटी पूजा.
दोनों शादीशुदा थे और अपने-अपने परिवारों के खुश थे. पूजा की शादी चनन सिंह ने 4
वर्ष पहले बड़ी धूमधाम के साथ मनमोहन के साथ की थी.
पूजा
बीए पास और अच्छे संस्कारों वाली समझदार लडकी थी. अपने ससुराल आकर पति के साथ-साथ
उसने सब का मन मोह लिया था. मनमोहन ने एमबीए तक शिक्षा प्राप्त की थी और अच्छी कोई
सरकारी नौकरी ना मिलने के कारण इन दिनों पंजाब स्थित हिंदुस्तान हाइड्रोलिक कम्पनी
में आफिस्र के पद पर ज्वाइन कर रखा था. मनमोहन की माँ के निधन के बाद मनमोहन और
उसके पिता के काम पर चले जाने के बाद पूजा दिन भर अपने घर पर अकेली रहती थी. इसलिए
घर का मुख्य द्वार पूरे दिन बंद रहता था. घर पर और किसी आदमी का आना-जाना ना होने
के कारण शाम को मनमोहन या उसके पिता के घर लौटने पर ही मुख्य द्वार खोला जाता था.
पूजा का लापता होना और तलाश
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| पूजा का पति मनमोहन ठाकुर |
इस लिए अपने घर का मुख्य द्वार खुला देखकर मनमोहन को आश्चर्य हुआ था. बहरहाल
दो-तीन बार डोरबैल बजाने के बाद जब भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो द्वार
थपथपाने के लिए उसने जैसे ही दरवाजा बजाना चाहा तो हाथ रखते ही दरवाज़ा अपने आप खुल
गया था. यह देखकर मनमोहन को और अधिक आश्चर्य हुआ था. असमंजस की स्थिति में अपनी
पत्नी पूजा को आवाज़ देते हुए उसने घर के भीतर जाकर देखा तो भीतर कमरे का दृश्य
देखकर उसके होश उड़ गये थे. कमरे के भीतर का पूरा सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा था,
देखकर ऐसा लगता था जैसे कमरे में दो लोगों का आपस में जबरदस्त संघर्ष हुआ हो. घर
के सभी कमरे खुले हुए थे और उनका सामान बिखरा पीडीए था. यहाँ ऐसा क्या हुआ था यह
जानने के लिए वह पूजा को लगातार आवाज़े देता रहा था पर पूजा का कहीं कोई अत्ता-पता
नहीं था. उसके घर ऐसा आजसे पहले कभी नहीं हुआ था. काम से लौटने पर पूजा अपना
मुस्कराता चेहरा लेकर दरवाज़े पर उसके इन्तजार में खड़ी मिलती थी. किसी अनहोनी की
आशंका से उसका ह्रदय कांपने लगा था. पागलों की भांति पूजा को आवाज़े देते हुए वह घर
से बाहर निकल आया था तब उसकी पड़ोसन ने बताया कि दोपहर को उनके घर कोई रिश्तेदार
आया था और पूजा ने उसके लिए दरवाज़ा खोला था. वह कौन था यह वह नहीं बता सकी थी. हाँ
उसने इतना आवश्य बताया था कि शाम को उसी ने ही दरवाजा अंदर की ओर धकेला था क्योंकि
कुत्ते घर के अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे.
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| पूजा का ससुर सुभाष और रिश्तेदार |
पड़ोसन
की बात सुनकर मनमोहन चिंताग्रस्त होगया था. रह-रहकर उसकी समझ में यह बात नहीं आ
रही थी कि आखिर वह कौन रिश्तेदार था जिसके आने के बाद घर की यह हालत हुई थी, और
सबसे बड़ा सवाल यह था कि पूजा कहाँ गायब हो गई थी. उसकी समझ में यह भी नहीं आरहा था
कि वह पूजा का घर बैठकर इंतजार करे या उसकी तलाश में कहीं जाए. लेकिन जाये तो जाये
कहाँ? फिर भी पड़ोसियों और मनमोहन ने पूजा
की तलाश की और अस्पतालों में भी देखा. पर पूजा का कोई पता नहीं चला था. वह बदहवासी
में अभी कुछ सोचने का प्रयास कर रहा था कि तभी उसके पिता सुभाष भी घर पहंच गये थे.
पूजा की लाश का घर से ही मिलना
वे पिछले एक सप्ताह से हिमाचल बाबा बालक नाथ के डेरे संगत के साथ गये हुए थे. बेटे को यूँ बदहवास देख उन्हें भी चिंता होने लगी थी. इसके बाद पूरे मोहल्ले में पूजा के घर से लापता होने की बात फैल गयी थी. सांत्वना और सहयोग के लिए पूरा मोहल्ला उनके घर आ जूटा था. अचानक एक पड़ोसी की नज़र मनमोहन के कमरे में रखे बेड पर पड़ी तो वह चौंका. बंद बेड पर गद्दे के नीचे से किसी औरत की छोटी के बाल बाहर झांक रहे थे. उसका अनुसरण करते हुए वहां मौजूद सभी लोगों ने उस ओर देखा. और फिर गद्दे को उठाकर बेड को जब खोला गया तो बेड के भीतर का द्रश्य देख एकाएक वहां उपस्थित सभी लोगों के कंठ से चीख निकल गई थी. बेड के भीतर पूजा की लाश पड़ी थी. एकाएक किसी को भी अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था. उस समय मनमोहन की जो हालत थी उसका अनुमान लगाना मुश्किल था. किसी बेजान प्राणी की तरह वो बेड पकड़ कर वहीँ फर्श पर बैठ गया था. ज़ाहिर सी बात थी कि पूजा की किसी ने हत्या करके लाश को बेड में छुपा दिया था. काफी देर बाद लोगों के सांत्वना देने पर जब वह सामान्य हुआ तो घर के किसी भी सामान को छुए बिना सबसे पहले उसने तुरंत इस घटना की सूचना थाना कैंट फिरोजपुर पुलिस को दी गई थी. साथ ही पूजा की हत्या की खबर उसने अपने ससुर चानन सिंह को भी दे दी थी. यह घटना 27 नवम्बर 2018 की है.
पूजा की लाश का घर से ही मिलना
वे पिछले एक सप्ताह से हिमाचल बाबा बालक नाथ के डेरे संगत के साथ गये हुए थे. बेटे को यूँ बदहवास देख उन्हें भी चिंता होने लगी थी. इसके बाद पूरे मोहल्ले में पूजा के घर से लापता होने की बात फैल गयी थी. सांत्वना और सहयोग के लिए पूरा मोहल्ला उनके घर आ जूटा था. अचानक एक पड़ोसी की नज़र मनमोहन के कमरे में रखे बेड पर पड़ी तो वह चौंका. बंद बेड पर गद्दे के नीचे से किसी औरत की छोटी के बाल बाहर झांक रहे थे. उसका अनुसरण करते हुए वहां मौजूद सभी लोगों ने उस ओर देखा. और फिर गद्दे को उठाकर बेड को जब खोला गया तो बेड के भीतर का द्रश्य देख एकाएक वहां उपस्थित सभी लोगों के कंठ से चीख निकल गई थी. बेड के भीतर पूजा की लाश पड़ी थी. एकाएक किसी को भी अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था. उस समय मनमोहन की जो हालत थी उसका अनुमान लगाना मुश्किल था. किसी बेजान प्राणी की तरह वो बेड पकड़ कर वहीँ फर्श पर बैठ गया था. ज़ाहिर सी बात थी कि पूजा की किसी ने हत्या करके लाश को बेड में छुपा दिया था. काफी देर बाद लोगों के सांत्वना देने पर जब वह सामान्य हुआ तो घर के किसी भी सामान को छुए बिना सबसे पहले उसने तुरंत इस घटना की सूचना थाना कैंट फिरोजपुर पुलिस को दी गई थी. साथ ही पूजा की हत्या की खबर उसने अपने ससुर चानन सिंह को भी दे दी थी. यह घटना 27 नवम्बर 2018 की है.
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| पूजा के पिता चानन सिंह |
पूजा
की हत्या की खबर सुनते ही पूजा के माता पिता वहां पहुंच गये थे. पुलिस ने क्राईम
टीम सहित वहां पहुंचकर अपनी करवाई शुरू कर दी थी. पूरे घर को सील कर दिया गया था.
फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट जगह-जगह से उंगलियों के निशान उठा रहे थे. किसी सबूत की
तलाश में बारीकी से घर की तलाशी ली गई थी. थाना कैंट एसएचओ इं जसबीर सिंह ने बड़ी
बारीकी से लाश का मुआयना किया था. पूजा की हत्या गला घोंट कर की गई थी. उसके गले
पर इस बात के स्पष्ट निशान थे. इस घटना की सूचना मिलते ही एसपी (डी) बलजीत सिंह
सिदू, डीएसपी जसपाल सिंह ढिल्लों, जिला सीआईऐ प्रभारी तरलोचन सिंह ने भी मौकाए
वारदात पर पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना किया. क्राईम टीम के अपना काम खत्म करने पर
इं जसबीर सिंह ने पूजा के पिता चानन सिंह के बयान पर पूजा की हत्या का मुकदमा
अपराध संख्या – 139 पर धारा -302 के तहत हत्या का मुकदमा अज्ञात लोगों के खिलाफ
दर्ज कर पूजा की लाश को कब्जे में लेकर उसका पंचनामा करने के बाद पोस्टमार्टम के
लिए जिला अस्पताल भेज दिया था.
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| हत्यारा अजय पटियाल |
पुलिस तहकीकात
प्रथम जांच में इं जसबीर सिंह को मनमोहन के बयानों से पता चला था कि उसके घर में किसी बाहरी व्यक्ति का आना जाना बिलकुल नहीं था. रिश्तेदारों का आना जाना भी ना के बराबर था. इस परिवार की किसी के साथ कोई दुश्मनी वगेरह भी नहीं थी. ये अपने काम से काम रखने वाले लोग थे. ऐसे में शहर के व्यस्तम इलाके में दिन दहाड़े किसी के घर में घुसकर उसकी हत्या करने जैसी बात ना तो पुलिस को हज़म हो रही थी और ना ही मोहल्ले वालों को. इं जसबीर को एक बात शुरू से ही खटक रही थी कि यह किसी घर के आदमी का काम ही हो सकता है. किसी बाहरी व्यक्ति की सम्भावना कम नज़र आती थी. सो मनमोहन को पुलिस ने अपने शक के दायरे में रखकर जांच शुरू की थी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के समय मनमोहन और उसका पिता सुभाष भले ही अपने घर के आसपास नहीं थे, पर पैसे देकर यह काम वह किसी किराये के हत्यारे से भी करवा सकते थे. घटना वाले दिन मनमोहन और सुभाष घटनास्थल से दूर थे.. उनके फोन रिकार्ड से भी पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा था. मृतका पूजा के फोन रिकार्ड भी चेक किये गए थे, सब बेदाग थे. पोस्टमार्टम के अनुसार पूजा की हत्या गला घोंट कर ही की गई थी. पोस्टमार्टम के बाद उसकी लाश परिजनों के हवाले कर दी गई थी और उसी शाम उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था.
प्रथम जांच में इं जसबीर सिंह को मनमोहन के बयानों से पता चला था कि उसके घर में किसी बाहरी व्यक्ति का आना जाना बिलकुल नहीं था. रिश्तेदारों का आना जाना भी ना के बराबर था. इस परिवार की किसी के साथ कोई दुश्मनी वगेरह भी नहीं थी. ये अपने काम से काम रखने वाले लोग थे. ऐसे में शहर के व्यस्तम इलाके में दिन दहाड़े किसी के घर में घुसकर उसकी हत्या करने जैसी बात ना तो पुलिस को हज़म हो रही थी और ना ही मोहल्ले वालों को. इं जसबीर को एक बात शुरू से ही खटक रही थी कि यह किसी घर के आदमी का काम ही हो सकता है. किसी बाहरी व्यक्ति की सम्भावना कम नज़र आती थी. सो मनमोहन को पुलिस ने अपने शक के दायरे में रखकर जांच शुरू की थी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के समय मनमोहन और उसका पिता सुभाष भले ही अपने घर के आसपास नहीं थे, पर पैसे देकर यह काम वह किसी किराये के हत्यारे से भी करवा सकते थे. घटना वाले दिन मनमोहन और सुभाष घटनास्थल से दूर थे.. उनके फोन रिकार्ड से भी पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा था. मृतका पूजा के फोन रिकार्ड भी चेक किये गए थे, सब बेदाग थे. पोस्टमार्टम के अनुसार पूजा की हत्या गला घोंट कर ही की गई थी. पोस्टमार्टम के बाद उसकी लाश परिजनों के हवाले कर दी गई थी और उसी शाम उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था.
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| पूछताछ करते पुलिस अधिकारी |
पूजा
की हत्या की सूचना शहर भर में चर्चा का विषय बन गई थी. पुलिस पर हर पल की रिपोर्ट
स्वंय एसपी साहब ले रहे थे. पर इस मामले में अभी तक पुलिस के हाथ खाली थे. क्योंकि
पूजा का पति मनमोहन शुरुसे ही पुलिस के शक के दायरे में था इसलिए पुलिस ने मनमोहन
और उसके पिता से कई बार अलग-अलग तरीके से घुमा-फिर कर पूछताछ की थी और हर बार वे
निर्दोष ही साबित हुए थे. पूजा के पति पर शक करने की अधिक वजह यह भी थी कि पूजा
संतानहीन थी. शादी के 4 वर्षों बाद भी उसकी गोद हरी नहीं हुई थी. संतानहीन पत्नी
से पीछा छुड़ाने के लिए तो कहीं पूजा की हत्या नहीं की गई थी. पुलिस ने मनमोहन के
अलावा उसके ख़ास यारों दोस्तों और करीबी रिशेदारों से भी पूछताछ की थी. पर नतीजा
सिफर ही निकला था. जिले की स्पेशल स्टाफ पुलिस के अलावा और कई टीमे भी इस केस पर
काम कर रही थी. पुलिस के मुखबिर भी इस मामले में कोई खास जानकारी नहीं जुटा पाए
थे. इं जसबीर सिंह ने इस मामले को लूटपाट के नज़रिए से भी देखा और इलाके के सभी
छोटे-बड़े हिस्ट्रीशीटरों से लेकर छोटे मोटे चोरों, जेबतराशों और उठाईगीरों को भी
राऊंडअप किया. पर नतीजा कुछ भी नहीं निकला था. पूजा की हत्या को हुए अब तक एक
महीने से ऊपर का वक्त गुज़र चुका था और केस धीरे-धीरे ठंडे बसते की बढ़ने लगा था.
हालाँकि इस मामले में इं जसबीर सिंह अभी पूरी तरह निराश नहीं हुए थे. पर उनके लाख
सम्भव प्रयासों के बाद भी कोई ऐसा सूत्र हाथ नहीं लगा था जिससे यह मामला क्रेक
होता दिखाई देता. लोग भी धीरे –धीरे इस केस को भूलने लगे थे. दो महीनों से अधिक
वक्त गुज़र चूका था कि एक दिन खुद सामने से चलकर एक ऐसा सूत्र इन जसबीर सिंह के
सामने आया जिसने केस को एक नई दिशा दे दी था.
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| इस घर में हुई थी पूजा की हत्या |
इस घटना
के लगभग दो महीने गुज़र जाने के बाद अपने घर की अलमारी के लाकर से कोई जरूरी कागज़ात
ढूढ़ते हुए मनमोहन अचानक एक झटका लगा था. उसकी अलमारी के लाकर में रखे हुए कीमती
ज़ेवरात गायब थे. मनमोहन ने इस बात की खबर तुरन्त इं जसबीर सिंह को दी. ज़ेवरात कैसे
गायब हुए थे यह तो वह ठीक से बता नहीं पाया था पर यह बात उसने दावे के साथ कही थी
कि ज़ेवरात पूजा की हत्या से पहले ही गायब हुए थे. क्योंकि उसके और पूजा के
अतिरिक्त जेवरातों की जानकारी किसी को नहीं थी. पूजा मरने के बाद जेवरात अपने साथ
नहीं ले जा सकती थी, इस लिए ज़ाहिर है कि उसके सामने या उसकी हत्या के बाद. या
सम्भव है इन्हीं जेवरातों की खातिर ही पूजा की हत्या की गई थी. यह एक जबरदस्त
पोआंइट इं जसबीर सिंह के सामने था. उनहोंने अपनी जाँच का दायरा बदलते हुए जांच को
शहर के सोनारों, खास करके उन सुनारों की तरफ मोड़ दिया जो चोरी का माल खरीदते थे.
इं जसबीर सिंह ने उन्हें मनमोहन के घर से गायब सामान की लिस्ट देते हुए उन्हें सख्त
चेतावनी देते हुए कहा की यदि कोई चोर चोरी का सामान बेचने आये तो उन्हें खबर दी
जाये. और फिर एक दिन पुलिस की मेहनत रंग लायी,
हत्यारे का पता लगना
दिनांक-20 फरवरी 2019 को शहर के एक सुनार ने फोन द्वारा इं जसबीर सिंह को सूचना दी कि अजय पटियाल नामक एक व्यक्ति मनमोहन के घर से चोरी हुए गहनों से मिलते जुलते गहने उसकी दुकान पर बेचने आया है. इस सुचना पर इं जसबीर सिंह एएसआई जसपाल सिंह, बलविंदर सिंह, हवलदार गुतेज सिंह और जसवीर सिंह के साथ सुनार की दुकान पर पहुंचे और अजय को देख कर चौंक उठे थे. अजय मनमोहन का ही रिश्तेदार था. वह वीर नगर गली नम्बर-1 निवासी उसके मामा का पुत्र था. मजे की बात यह है कि इं जसबीर सिंह शक के आधार पर तीन बार पूछताछ के लिए अजय को थाने बुला चुके थे. पर ठोस सबूतों के आभाव से उसे छोड़ना पड़ा था. बहरहाल वे गहनों सहित अजय को गिरफ्तार कर थाने ले आये. पूछने पर अजय ने बताया यह गहने उसके अपने है. फिर बाद में बताया कि गहने उसके किसी दोस्त के है और उसने अपनी बीमार माँ का इलाज करवाने के लिए उसे बेचने के लिए दिए थे. किस दोस्त ने गहने दिए थे यह वो बता नहीं पाया था. इं जसबीर सिंह ने मनमोहन और उसके पिता सहित मृतक पूजा के माता-पिता को भी थाने बुलवाकर जब गहनों की शिनाख्त करवाई तो उन्होने तुरन्त गहनें पहचान लिए थे. अजय से बरामद गहनें पूरे नहीं थे सो इं जसबीर ने अजय को अदालत में पेश कर उसका दो दिन का रिमांड ले लिया था. रिमांड के दौरान अजय से बाकी गहनें भी बरामद किये गये जो उसने अपने घर मर छुपाकर रखे थे.
दिनांक-20 फरवरी 2019 को शहर के एक सुनार ने फोन द्वारा इं जसबीर सिंह को सूचना दी कि अजय पटियाल नामक एक व्यक्ति मनमोहन के घर से चोरी हुए गहनों से मिलते जुलते गहने उसकी दुकान पर बेचने आया है. इस सुचना पर इं जसबीर सिंह एएसआई जसपाल सिंह, बलविंदर सिंह, हवलदार गुतेज सिंह और जसवीर सिंह के साथ सुनार की दुकान पर पहुंचे और अजय को देख कर चौंक उठे थे. अजय मनमोहन का ही रिश्तेदार था. वह वीर नगर गली नम्बर-1 निवासी उसके मामा का पुत्र था. मजे की बात यह है कि इं जसबीर सिंह शक के आधार पर तीन बार पूछताछ के लिए अजय को थाने बुला चुके थे. पर ठोस सबूतों के आभाव से उसे छोड़ना पड़ा था. बहरहाल वे गहनों सहित अजय को गिरफ्तार कर थाने ले आये. पूछने पर अजय ने बताया यह गहने उसके अपने है. फिर बाद में बताया कि गहने उसके किसी दोस्त के है और उसने अपनी बीमार माँ का इलाज करवाने के लिए उसे बेचने के लिए दिए थे. किस दोस्त ने गहने दिए थे यह वो बता नहीं पाया था. इं जसबीर सिंह ने मनमोहन और उसके पिता सहित मृतक पूजा के माता-पिता को भी थाने बुलवाकर जब गहनों की शिनाख्त करवाई तो उन्होने तुरन्त गहनें पहचान लिए थे. अजय से बरामद गहनें पूरे नहीं थे सो इं जसबीर ने अजय को अदालत में पेश कर उसका दो दिन का रिमांड ले लिया था. रिमांड के दौरान अजय से बाकी गहनें भी बरामद किये गये जो उसने अपने घर मर छुपाकर रखे थे.
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| इस हाल में मिली थी पूजा की लाश |
हत्या की कहानी
अजय
दरअसल नशे का आदि था, और पूजा की हत्या उसने अपने नशे पूर्ति के लिए ही की थी. इसे
इतेफाक समझा जाये या कुछ और घटना वाले दिन वह पूजा की हत्या करने के इरादे से
मनमोहन के घर नहीं आया था. क्योंकि अजय नशे का आदि था इसलिए कोई रिश्तेदार उसे
पसंद नहीं करता था और ना ही अपने घर में घुसने देता था. पूछताछ के दौरान अजय ने
बताया की उसदिन वह मनमोहन से कुछ रुपये उधार लेने उसके घर आया था पर इतेफाकन
मनमोहन अपने काम पर जा चूका था. पूजा घर में अकेली थी. पूजा ने अजय को इज्जत से
बिठाया और उसके लिए चाय बनाने रसोई घर में चली गई थी. आखिरकार अजय रिश्ते में उनका
मामा था और चाय- पानी पूछना उसका फर्ज बन जाता था. जिस समय अजय मनमोहन के घर आयता
उस समय पूजा अलमारी खोलकर उसमे कुछ सामान रख रही थी. अजय के आ जाने के कारण वह
अलमारी खुली छोडकर ही चाय बनाने चली गई थी. अचानक अजय की नज़र खुली अलमारी पर पड़ी
तो यह सोचकर वह उठकर अलमारी की ओर चला गया कि शायद उसमे रखे कुछ रुपये उसके हाथ लग
जाये. पर अलमारी में रखे जेवर देखकर उसकी आँखे चमक उठी थी. घने देखकर उसे लगा जैसे
उसके कई दिन के नशा पूर्ति का इंतजाम हो गया है. उसने अलमारी में रखे सारे घने उठा
लिए और तभी पूजा ने चाय लेकर कमरे में प्रवेश किया. अजय को गहने चोरी करे देख वह
भौचकी रह गई. हैरान होते हुए उसने अजय के हाथों से गहनें छीनने की कोशिश करते हुए
कहा.
‘’
मामा जी यह आप क्या कर रहे है.’’
अजय
के सिर पर हो नशे का भूत सवार था सो उसने पूजा को एक ओर धकेलते हुए घर से भाग जाने
की कोशिश की. पूजा ने उठकर उसका रास्ता रोक लिया था. वह किसी भी कीमत पर अजय को
वहां से गहनें नहीं लेकर जाने देना चाहती थी.पूजा द्वारा विरोध करने पर अजय को ऐसा
लगा जैसे पूजा उसकी दुनियां चीन लेना चाहती हो. इसी चाइना झपटी में अजय ने पूजा का
गला दबा कर उसे मौत के घाट उतार दिया था. पूजा की हत्या करने के बाद अजय घबरा गया.
उसने पूजा की लाश को एक सूटकेस में भरा और सूटकेस बेड में रखकर वहां से चुप चाप
निकल आया था.
पुलिस
करवाई और तमाम पूछताछ पूरी होने के बाद रिमांड की अवधि समाप्त होने पर
दिनांक-22-2-2019 अजय को अदालत में पेश किया गया जहाँ अदालत के आदेश पर उसे जिला
जेल भेजा गया था.
(
पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा का नाट्य रुपान्तरण )
-साहिल
कपूर








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