लाश के 16 टुकड़े करने वाले हत्यारे को
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| फांसी की सज़ा मिलने के बाद अदालत से बाहर आते हुए शैलेश और उसकी पत्नी अनुराधा |
सजाए-मौत
अपनी बेइज्जती का
बदला लेने के लिए शैलेश ने जिस तरह अपने दिमाग का इस्तेमाल किया था, वह काबिले तारीफ था. उस की योजना फूलप्रूफ थी.
लेकिन लाश ठिकाने लगाने में की गई देर ने उस की पोल खोल दी. कई बार इंसान जुर्म करते वक्त दरिंदा बन जाता
है. कई मामले तो ऐसे हैं, जिनमें
कत्ल के बाद भी उसका गुस्सा लाश पर उतरता है, तो कई मामलों में सबूत मिटाने के मकसद से मुर्दा
जिस्मों के साथ हैवानियत दिखाई जाती है.
अतिरिक्त जिला एवं
सत्र न्यायधीश बठिंडा कंवलजीत सिंह बाजवा की अदालत में दिनांक 15 मार्च 2019 के
दिन एक अपराध का फैसला सुनाये जाने वाला
था जिस में अपराधियों ने क्रूरता की सारी सीमाएं पार कर दी थी. अपने आप में यह एक
ऐसा अपराध था जिसे सुन कर आम लोगों की आत्मा तक कांप उठी थी. अपराधियों को कानून
के कटघरे तक पहुँचाने में पुलिस ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी. आरोपियों को
गिरफ्तार करने के लिए तत्कालीन एसएसपी स्वप्न शर्मा के आदेश पर एसपी आपरेशन गुरमीत
सिंह और डीएसपी देहात कुलदीप सिंह के नेतृत्व में एक सर्च टीम तैयार की गई, जिस में एयरफोर्स के कई अधिकारियों सहित 40 जवानों, छोटेबड़े 90 पुलिस वालों और 30 मजदूरों
सहित एयरफोर्स के स्निफर डाग एक्सपर्ट की टीम को भी शामिल किया गया था. अभियोजन
पक्ष ने इस मामले में कुल मिलाकर 39 गवाह बनाये थे जिनमें से 3 गवाह प्रमुख थे.
अभियुक्तों की ओर से इस मुकद्मे की पैरवी एडवोकेट सुनील त्रपाठी कर रहे थे, जबकि
उनके सामने सरकारी वकील हरविंदर सिंह गिल थे. पेश मामले में गवाहों की गवाहियों के
बाद दोनों पक्षों के बहस पूरी हो चुकी थी और अब आगे जज साहब ने फाईनल डिसीजन देना
था. फैसले के लिए 15 मार्च की तारीख मुकर्रर की गई थी. इसके पहले पाठकों को इस
बेहद खौफनाक अपराध की प्रष्ठभूमि से अवगत करवाना लाज़मी है.
रात का खाना खाने के
बाद विपिन अपनी पत्नी कुमकुम से यह कह कर घर से निकला कि वह जरा टहल कर आता है. रात
का खाना खा कर टहलना विपिन की पुरानी आदत थी. घर का काम निपटाने के बाद कुमकुम
बिस्तर पर लेट कर पति का इंतजार करने लगी. यह 8 फरवरी, 2017 की बात है.
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| मृतक विपिन अपनी पत्नी और सेल के साथ जन्मदिन के अवसर पर |
घटनाक्रम
विपिन मूलरूप से गांव बेनीनगर, जिला गोंडा, उत्तर प्रदेश का रहने वाला था. उस के पिता का नाम त्रिवेणी शुक्ला था. 27 साल का विपिन कई साल पहले पंजाब के जिला बठिंडा में आ कर बस गया था. वहां उसे बठिंडा एयरबेस के एयरफोर्स स्टेशन में एयरफोर्स कर्मचारियों द्वारा बनाई गई कैंटीन एयरफोर्स वाइव्ज एसोसिएशन में नौकरी मिल गई थी. इस कैंटीन में ज्यादातर एयरफोर्स के अधिकारियों की पत्नियां ही घरेलू सामान खरीदने आया करती थीं. विपिन सुबह 9 बजे से शाम के 7 बजे तक कैंटीन में रहता था. उस के बाद घर आ कर वह कुछ देर आराम करता. इस के बाद रात का खाना खा कर टहलने निकल जाता. टहलते हुए एयरफोर्स कालोनी का एक चक्कर लगाना उस की दिनचर्या में शामिल था.
एयरफोर्स की कैंटीन
में काम करने की वजह से उसे एयरफोर्स कालोनी का स्टाफ क्वार्टर रहने के लिए मिला
हुआ था, जिस में वह अपनी पत्नी के साथ रहता था. उन दिनों
उस के घर गांव से उस के पिता और चाचा संतोष शुक्ला भी आए हुए थे. बहरहाल बिस्तर पर
लेटेलेटे कुमकुम की आंख लग गई. जब उस की नींद टूटी तो विपिन लौट कर नहीं आया था.
घबरा कर उस ने घड़ी की ओर देखा.
रात के 12 बजने वाले थे. विपिन अभी तक लौट कर नहीं आया था.
पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. आधे घंटे में वह लौट कर आ जाता था, पर उस रात… कुमकुम उठी और बगल
वाले कमरे में गई, जहां सो रहे विपिन के पिता और चाचा को जगा कर उस
ने विपिन के अब तक घर न लौटने की बात बताई. वे भी चिंतित हो उठे. इस के बाद सभी
विपिन की तलाश में निकल पड़े. उनके साथ पड़ोस के भी 5-7 लोग भी थे. पूरी रात ढूंढने पर भी विपिन का कहीं
पता नहीं चला. अगले दिन यानी 9 फरवरी, 2017 की सुबह कुमकुम अपने ससुर और चचिया ससुर के साथ
कैंटीन पर गई. विपिन वहां भी नहीं था.
विपिन का लापता होना
इस के बाद उस ने
एयरफोर्स के अधिकारियों को विपिन के लापता होने की सूचना दी. उसी दिन कुमकुम ने
बठिंडा के थाना सदर की पुलिस चौकी बल्लुआना जा कर विपिन की गुमशुदगी दर्ज करा दी.
इस के बाद सभी अपने स्तर से भी विपिन की तलाश करते रहे. पर उस का कहीं कोई सुराग नहीं मिला. धीरेधीरे
विपिन को लापता हुए एक सप्ताह बीत गया. इस मामले में एयरफोर्स के अधिकारियों ने भी
कोई विशेष काररवाई नहीं की थी. पुलिस ने भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया था. हर
ओर से निराश हो कर 14 फरवरी, 2017 को
कुमकुम बठिंडा के तत्कालीन एसएसपी स्वप्न शर्मा के आफिस जा कर उन से मिली और पति
के लापता होने की जानकारी दे कर निवेदन किया कि उस के पति की तलाश करवाई जाए.
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| मृतक की पत्नी कुमकुम |
एसएसपी स्वप्न शर्मा
ने उसी समय फोन द्वारा थाना सदर के थानाप्रभारी वेदप्रकाश को आदेश दिया कि मुकदमा
दर्ज कर के इस मामले में तुरंत काररवाई करें. इस के बाद पुलिस चौकी बल्लुआना में
कुमकुम के बयान नए सिरे से दर्ज किए गए इस केस में कुमकुम ने आशंका व्यक्त की थी कि या
तो उस के पति विपिन शुक्ला का अपहरण हुआ है या हत्या कर के लाश कहीं छिपा दी गई
है. कुमकुम के इस बयान के आधार पर पुलिस ने विपिन की गुमशुदगी के साथ अपहरण का
मुकदमा दर्ज कर काररवाई शुरू कर दी.
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| 16 पोलिबैग में लाश के टुकड़े |
पुलिस हर प्रकार से
विपिन शुक्ला की तलाश कर के थक चुकी थी. मुखबिरों का भी सहारा लिया गया था. लेकिन
उन से भी कोई लाभ नहीं मिला. शहर के बदनाम लोगों से भी पूछताछ की गई, पर नतीजा शून्य ही रहा.
इंसपेक्टर वेदप्रकाश
पर एसएसपी स्वप्न शर्मा की ओर से काफी दबाव डाला जा रहा था. इसलिए उन्होंने नए
सिरे से जांच करते हुए एयरफोर्स कालोनी के निवासियों और कैंटीन कर्मचारियों से
पूछताछ की. इस पूछताछ में उन्हें लगा कि विपिन की गुमशुदगी में कालोनी के ही किसी
आदमी का हाथ है. उन्होंने अपने मुखबिरों को कालोनी वालों पर नजर रखने को कहा.
पुलिस और मुखबिर कालोनी में सुराग ढूंढने में लगे थे. अगले दिन यानी 21 फरवरी को वेदप्रकाश ने शैलेश को पूछताछ करने के
लिए थाने बुलाना चाहा तो पता चला कि बिना एयरफोर्स अधिकारियों से इजाजत लिए पूछताछ
करना संभव नहीं है. इस पर अगले दिन इं वेदप्रकाश ने एयरफोर्स के अधिकारियों से
इजाजत ले कर सार्जेंट शैलेश से उन्हीं के सामने पूछताछ शुरू की. दूसरी ओर एसएसपी
स्वप्न शर्मा के आदेश पर एसपी औपरेशन गुरमीत सिंह और डीएसपी देहात कुलदीप सिंह के
नेतृत्व में एक सर्च टीम तैयार की गई, जिस में एयरफोर्स के
अधिकारियों सहित 40 जवानों, छोटेबड़े 90 पुलिस वालों और 30 मजदूरों
सहित एयरफोर्स के स्निफर डौग एक्सपर्ट की टीम को शामिल किया गया.
विपिन की तलाश में पुलिस
इस भारीभरकम टीम ने एयरफोर्स कालोनी में सुबह 9 बजे से सर्च अभियान शुरू करते हुए एक-एक क्वार्टर की तलाशी लेनी शुरू की. दूसरी ओर सार्जेंट शैलेश से पूछताछ चल रही थी. पूछताछ में शैलेश ने बताया कि अन्य लोगों की तरह उसकी भी विपिन से जानपहचान थी. लेकिन वह उस की गुमशुदगी के बारे में कुछ नहीं जानता. लेकिन थानाप्रभारी के पास कुछ ऐसी जानकारियां थीं, जिन्हें शैलेश छिपाने की कोशिश कर रहा था. शैलेश से अभी पूछताछ चल ही रही थी कि कालोनी में सर्च अभियान चलाने वाली टीम में शामिल स्निफर डौग भौंकते हुए सार्जेंट शैलेश शर्मा के क्वार्टर में घुस गया. कुत्ते के पीछे पुलिस अफसर भी घुस गए. सार्जेंट शैलेश शर्मा को भी वहीं बुला लिया गया. पूरे क्वार्टर में अजीब सी दुर्गंध फैली थी. जब विश्वास हो गया कि इस क्वार्टर में लाश जैसी कोई चीज है तो पुख्ता सबूत के लिए इलाका मजिस्ट्रैट और तहसीलदार भसीयाना (बठिंडा ) को भी मौका पर बुलावा लिया गया.
इस भारीभरकम टीम ने एयरफोर्स कालोनी में सुबह 9 बजे से सर्च अभियान शुरू करते हुए एक-एक क्वार्टर की तलाशी लेनी शुरू की. दूसरी ओर सार्जेंट शैलेश से पूछताछ चल रही थी. पूछताछ में शैलेश ने बताया कि अन्य लोगों की तरह उसकी भी विपिन से जानपहचान थी. लेकिन वह उस की गुमशुदगी के बारे में कुछ नहीं जानता. लेकिन थानाप्रभारी के पास कुछ ऐसी जानकारियां थीं, जिन्हें शैलेश छिपाने की कोशिश कर रहा था. शैलेश से अभी पूछताछ चल ही रही थी कि कालोनी में सर्च अभियान चलाने वाली टीम में शामिल स्निफर डौग भौंकते हुए सार्जेंट शैलेश शर्मा के क्वार्टर में घुस गया. कुत्ते के पीछे पुलिस अफसर भी घुस गए. सार्जेंट शैलेश शर्मा को भी वहीं बुला लिया गया. पूरे क्वार्टर में अजीब सी दुर्गंध फैली थी. जब विश्वास हो गया कि इस क्वार्टर में लाश जैसी कोई चीज है तो पुख्ता सबूत के लिए इलाका मजिस्ट्रैट और तहसीलदार भसीयाना (बठिंडा ) को भी मौका पर बुलावा लिया गया.
सब की मौजूदगी में
जब सार्जेंट शैलेश के क्वार्टर की तलाशी ली गई तो वहां से जो बरामद हुआ, उस की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. वहां का
लोमहर्षक दृश्य देख कर पत्थरदिल एयरफोर्स और पुलिस के जवानों के भी दिल कांप उठे.
कुछ लोगों को तो चक्कर तक आ गए.
क्वार्टर में लापता
विपिन शुक्ला की लाश के 16
टुकड़े पड़े थे, जिन्हें
काले रंग की 16 अलग-अलग प्लास्टिक की थैलियों में पैक कर के
पैकेट बना कर फ्रिज में रखा गया था. लाश के टुकड़े बरामद होते ही सार्जेंट शैलेश
ने इलाका मजिस्ट्रैट, तहसीलदार, एयरफोर्स के
अधिकारियों और पुलिस के वरिष्ठ अफसरों के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया.
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| मृतक की पत्नी कुमकुम |
अपहरण की धारा 365 के तहत दर्ज इस मुकदमे में योजनाबद्ध तरीके से की
गई हत्या की धारा 302,
120बी और लाश को खुर्दबुर्द करने के लिए धारा
201 जोड़ दी गई. सार्जेंट शैलेश और उस की पत्नी
अनुराधा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इस हत्या का तीसरा आरोपी शशिभूषण फरार हो
गया था.
उस की तलाश में
पुलिस टीम उत्तराखंड भेजी गई. उसी दिन शाम को यानी 21 फरवरी, 2017 को एसपी आपरेशन गुरमीत सिंह ने प्रैसवार्ता कर इस
हत्याकांड के संबंध में विस्तार से जानकारी दी, साथ ही दोनों
गिरफ्तार अभियुक्तों शैलेश और अनुराधा को मीडिया के सामने पेश किया.
पुलिस अधिकारियों
द्वारा पूछताछ करने पर सार्जेंट शैलेश और अनुराधा ने विपिन शुक्ला की गुमशुदगी से
ले कर हत्या करने तक की जो कहानी बताई, वह अवैधसंबंधों और
बदनामी से बचने के लिए की गई हत्या का नतीजा थी—
सार्जेंट शैलेश
मूलरूप से उत्तराखंड का निवासी था. लगभग 7 साल पहले उस की
अनुराधा से शादी हुई थी. उस का एक 5 साल का बेटा है. इन
दिनों उस की पत्नी गर्भवती थी.
इस कहानी की शुरुआत 5 साल पहले सन 2014-15 से शुरू
हुई थी. 27 साल का विपिन शुक्ला खूबसूरत युवक था. हंसीमजाक
करना उस की आदत में था. वह एयरफोर्स की वाइव्ज एसोसिएशन की कैंटीन में काम करता
था. इस कैंटीन में एयरफोर्स के अफसरों जवानों की पत्नियां घरेलू सामान खरीदने आती
हैं.
सार्जेंट शैलेश की
खूबसूरत पत्नी अनुराधा भी यहां से सामान खरीदा करती थी. एक बच्चे की मां अनुराधा
काफी खूबसूरत थी. उसे देखते ही शादीशुदा विपिन अपना दिल हार बैठा था. उस ने बात को
आगे बढ़ाने के लिए पहल करते हुए अनुराधा से हंसीमजाक और छेड़छाड़ शुरू कर दी.
अनुराधा ने इस का
विरोध करते हुए विपिन को काफी खरीखोटी भी सुनाई, पर उस
ने उस का पीछा नहीं छोड़ा. धीरेधीरे अनुराधा को विपिन की छेड़छाड़ और हंसीमजाक में
आनंद आने लगा. इस से विपिन की हिम्मत बढ़ गई.
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| मृतक विपिन |
पहले दोनों में प्यार का इजहार हुआ, फिर मुलाकातें शुरू हुई. वक्त के साथ दोनों के बीच अवैधसंबंध भी बन गए. उसी बीच अनुराधा गर्भवती हो गई और शादीशुदा होते हुए भी विपिन पर शादी के लिए दबाव डालने लगी. उस का कहना था कि वह अपने पति को छोड़ देगी और विपिन अपनी पत्नी को तलाक दे दे. लेकिन विपिन ने अनुराधा की इस बात को मानने से इनकार कर दिया.
उस बीच शैलेश को भी
अपनी पत्नी के विपिन शुक्ला के साथ अवैध संबंध होने और उस के गर्भवती होने की
जानकारी मिल गई. उस ने अनुराधा को आड़े हाथों लेते हुए खूब फटकार लगाई. इस बात को
ले कर पति-पत्नी के बीच क्लेश भी शुरू हो गया. रोज-रोज के क्लेश से तंग आ कर शैलेश
अनुराधा को अपनी ससुराल उत्तराखंड ले गया और वहां उस ने यह बात अनुराधा के माता-पिता
और भाई को बताई तो उन्होंने भी अनुराधा को डांटते हुए फौरन विपिन से संबंध खत्म
करने को कहा.
शैलेश और अनुराधा
कुछ दिन उत्तराखंड रह कर बठिंडा लौट आए. वापस आने के बाद अनुराधा ने विपिन से
बातचीत करनी बंद कर दी. बार-बार बुलाने पर भी जब अनुराधा ने विपिन से बात नहीं की तो
नाराज हो कर वह अनुराधा को बदनाम करने लगा.
वह कालोनी वालों और
कैंटीन में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों को अपने और अनुराधा के अवैधसंबंधों की
कहानियां चटखारे लेले कर सुनाता. इस से सार्जेंट शैलेश और उस की पत्नी अनुराधा की
बदनामी होने लगी. शैलेश अपने अधिकारियों और कालोनी वालों से नजर मिलाने में कतराने
लगा.
एक दिन शैलेश ने
विपिन से मिल कर उसे समझाया, ‘‘देखो शैलेश, गलती चाहे किसी की भी रही हो, अब यह बात यहीं दफन कर दो. पिछली सभी बातों को
भूल कर भविष्य में हमें बदनाम करना बंद कर दो.’’
विपिन ने उस समय तो
शैलेश की बात मान कर वादा कर लिया, पर वह अपनी बात पर
कायम नहीं रह सका. उस की छिछोरी हरकतें जारी रहीं. विपिन जब अपनी हरकतों से बाज
नहीं आया और पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा तो शैलेश ने अपने साले शशिभूषण को
बठिंडा बुला लिया. शशिभूषण नेवी में नौकरी करता था. शैलेश के बुलाने पर
जब शशिभूषण बठिंडा पहुंचा तो शैलेश, अनुराधा और शशिभूषण
ने रोजरोज की इस बदनामी से अपना पीछा छुड़ाने के लिए विपिन का गला घोंट कर दफन
करने की योजना बना डाली. अपनी योजना पर अच्छी
तरह सोचविचार कर उसे अमली जामा पहनाने के लिए सब से पहले शैलेश ने अपने अधिकारियों
को अपना क्वार्टर बदलने की अर्जी दी. उसे एयरफोर्स कालोनी में क्वार्टर नंबर 214/10 अलाट था. उस ने अधिकारियों को मौजूदा क्वार्टर
में कुछ कमियां बता कर नया क्वार्टर अलाट करा लिया.
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| इस फ्रिज में लाश के टुकड़े थे |
‘‘क्यों क्या बात हो गई?’’ विपिन ने हैरानी से पूछा तो शैलेश ने मुसकराते
हुए कहा, ‘‘यार, तुम तो जानते ही हो
कि आज मुझे क्वार्टर बदलना है. काफी सामान तो पैक कर चुका हूं. बस कुछ सामान बचा
है. तुम चल कर पैक करवा दो. उस के बाद अनुराधा के हाथ की चाय पीएंगे.’’ शैलेश ने यह बात जानबूझ कर कही थी. सुन कर विपिन झट से
तैयार हो गया. शैलेश विपिन को ले कर अपने पुराने क्वार्टर पर पहुंचा. सामान पैक
करते हुए विपिन जब नीचे की ओर झुका, तभी उस ने पीछे से
विपिन के सिर पर कुल्हाड़ी का भरपूर वार कर दिया. बिना चीखे ही विपिन फर्श पर ढेर
हो गया. शशिभूषण ने भी उस की गरदन पर एक वार कर के सिर धड़ से अलग कर दिया.
इस के बाद तीनों ने
मिल कर विपिन की लाश को एक बड़े ट्रंक में डाल कर बाहर से ताला लगा दिया और घर के
अन्य सामान के साथ लाश वाला ट्रंक भी नए क्वार्टर में ले आए.
विपिन की हत्या करने
के बाद जहां शैलेश ने चैन की सांस ली थी, वहीं उसे यह चिंता
भी सताने लगी थी कि विपिन की लाश को ठिकाने कैसे लगाया जाए. वह कुछ सोच पाता, उस के पहले ही उसे अगले दिन अपने अधिकारियों से
पता चला कि विपिन रात से घर से लापता है. यह सुन कर उस ने लाश ठिकाने लगाने का
इरादा त्याग दिया.
उस ने सोचा कि कुछ
दिनों में मामला ठंडा हो जाएगा तो इस विषय पर वह सोचेगा. पर विपिन की पत्नी कुमकुम
के बारबार एयरफोर्स और पुलिस के अधिकारियों के पास चक्कर लगाने से मामला ठंडा होने
के बजाए और अधिक गरमाता गया.
कुत्तों को खिलने के लिए लाश के 16 टुकड़े करना
लाश को ठिकाने लगाना जरूरी था. फरवरी का महीना होने के कारण मौसम बदल रहा था. ज्यादा दिनों तक लाश को रखा नहीं जा सकता था, इसलिए सोच-विचार कर शैलेश ने 19 फरवरी को विपिन की लाश के छोटे-छोटे 16 टुकड़े किए और उन्हें पौलिथिन की अलग-अलग थैलियों में भर फ्रिज में रख दिया ताकि बदबू न फैले.
लाश को ठिकाने लगाना जरूरी था. फरवरी का महीना होने के कारण मौसम बदल रहा था. ज्यादा दिनों तक लाश को रखा नहीं जा सकता था, इसलिए सोच-विचार कर शैलेश ने 19 फरवरी को विपिन की लाश के छोटे-छोटे 16 टुकड़े किए और उन्हें पौलिथिन की अलग-अलग थैलियों में भर फ्रिज में रख दिया ताकि बदबू न फैले.
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| एडवोकेट हरविंदर सिंह गिल |
अभियुक्त सार्जेंट
शैलेश कुमार और अनुराधा को उसी दिन अदालत में पेश कर के थानाप्रभारी वेदप्रकाश ने 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया. रिमांड अवधि
में शैलेश और अनुराधा की निशानदेही पर उन के घर से हत्या में इस्तेमाल की गई
कुल्हाड़ी और मृतक विपिन शुक्ला का मोबाइल बरामद कर लिया गया. पूछताछ और पुलिस
काररवाई पूरी कर के दोनों को 23 फरवरी को अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया.
अपनी बेइज्जती का
बदला लेने के लिए शैलेश ने जिस तरह अपने दिमाग का इस्तेमाल किया था, वह काबिले तारीफ था. उस की योजना फूलप्रूफ थी.
लेकिन लाश ठिकाने लगाने में की गई देर ने उस की पोल खोल दी.
बठिंडा के सरकारी
अस्पताल के डाक्टरों ने मृतक विपिन की लाश के टुकड़ों का पोस्टमार्टम करने से
इनकार करते हुए कहा था कि तकनीकी कारणों और पुख्ता सबूतों के लिए पोस्टमार्टम
फरीदकोट के मैडिकल कालेज में करवाना ठीक रहेगा.
अदालत का फैसला-सजाए-मौत
इस मामले में मृतक की पत्नी कुमकुम का आरोप है कि अगर एयरफोर्स और स्थानीय पुलिस सही समय पर काररवाई करती तो उस के पति की लाश इस तरह 16 टुकड़ों में न मिलती. विपिन की लाश 12 दिनों तक सलामत थी. इस के बाद ही हत्यारों ने उस के टुकड़े किए थे.
इस मामले में मृतक की पत्नी कुमकुम का आरोप है कि अगर एयरफोर्स और स्थानीय पुलिस सही समय पर काररवाई करती तो उस के पति की लाश इस तरह 16 टुकड़ों में न मिलती. विपिन की लाश 12 दिनों तक सलामत थी. इस के बाद ही हत्यारों ने उस के टुकड़े किए थे.
दोनों पक्षों की बहस
और दलीलें सुनने के पश्चात इस मामले में अदालत अपना निर्णय सुनाती उसके पहले बचाव
पक्ष के वकील सुनील त्रिपाठी ने अदालत से अनुरोध करते हुए इस बात का हवाला दिया था
कि गिरफ्तारी के समय इस मामले की आरोपी और सह अभियुक्ता अनुराधा गर्भवती थी और
उसके बाद का अबतक का समय उसने बड़ी पीड़ा और कष्ट से गुज़ारा था, उसका एक बच्चा भी
है. सो अदालत उस पर रहम करते हुए कम से कम सज़ा सुनाने की कृपा करे.
अपना फैसला सुनते
हुए दिनांक 15 मार्च 2019 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश बठिंडा कंवलजीत सिंह
बाजवा ने कहा.
कई बार इंसान जुर्म
करते वक्त दरिंदा बन जाता है. कई मामले तो ऐसे हैं, जिनमें
कत्ल के बाद भी उसका गुस्सा लाश पर उतरता है, तो कई मामलों में
सबूत मिटाने के मकसद से मुर्दा जिस्मों के साथ हैवानियत दिखाई जाती है.
यह मामला भी ऐसा ही
एक घृणित अपराध की सीमाओं को पार कर देने वाला है. सो तमाम सबूतों और गवाहों के
बयानों की रौशनी में यह अदालत इस मामले की
श अभियुक्ता अनुराधा को 5 साल की सज़ा सुनाती है
और दोषी शैलेश को विपिन की हत्या कर उसकी लाश को खुर्दबुर्द करने के इरादे
से क्रूरता दिखाते हुए 16 टुकड़े करने के अपराध में सजाए-मौत की सजा सुनाती है. सजा
सुनकर जज साहिब उठकर अपने केबिन में चले गये थे.
--हरमिन्दर कपूर








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