माँ की हवस का शिकार
बनी सोनम
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| सोनम की माँ लक्ष्मी |
आठ वर्ष पहले अपने पति से अलग होने के बाद लक्ष्मी ने सदर बज़ार के रघुनाथ मंदिर
के पास किराये के मकान में जब रहना शुरू तब उसकी मुलाकात अमित नामक व्यक्ति से
हुई. अमित भी उसी मोहल्ले का रहने वाला था. वह शादीशुदा था और उसके तीन बच्चे भी
थे. अमित का छोटा सा ठेकेदारी का काम था. वह बीमार मरीजों की देखभाल के लिए काम
वालियां उपलब्ध करवाया करता था.लक्ष्मी को भी उसीने काम पर लगवाया था, इसी कारण
उसका लक्ष्मी के घर आना-जाना बन गया था. लक्ष्मी अपने पति से अलग अकेली रहती थी,
उसे भी किसी सहारे, खासकर पुरुष के सहारे की जरूरत थी. सो दोनों के बीच पहले दोस्ती बनी
और फिर जल्दी ही वह रिश्ता बन गया जिसे हमारे समाज में नाजायज़ कहा जाता है.
बाज़ार से सामान लेकर जब लक्ष्मी वापिस अपने घर लौटी
तो उसकी बेटी 10 वर्षीय सोनम घर पर नहीं थी. घर के दरवाजे खुले हुए थे और कमरे में
टीवी चल रहा था. अपने आपसे बडबडाते हुए उसने कहा, ‘’लापरवाही की भी हद है, सारा घर
खुला छोड़ ना जाने कहाँ चली गई है साहबजादी.’’ घरेलू सामान रसोई में रख सबसे पहले
उसने कमरे में चल रहा टीवी बंद किया और उसके बाद वह सोनम की तलाश में घर के बाहर
निकल गई. उसने अड़ोस-पड़ोस से लेकर पूरे मोहल्ले में सोनम की तलाश की पर उसका कहीं
पता नहीं चला था. सोनम को ढूंढते रात हो चली थी. मोहल्ले वालों के अनुसार भी
उन्होंने सोनम को घर या घर के आसपास कहीं नहीं देखा था. जमाना खराब है, यह सोचकर
अब लक्ष्मी का चिंतित होना भी लाज़मी था. अचानक
उसे ध्यान आया कि कहीं सोनम उसे बिना बताये अपने पिता और दादी के घर ना चली गई हो.
ऐसा वह पहले भी कर चुकी थी. यह सोचकर वह सोनम का पता लगाने धक्का बस्ती की ओर चल
पड़ी. यह बात 19 जनवरी 2019 की है.
लक्ष्मी का ग्रहस्थ जीवन
लक्ष्मी की
शादी आज से लगभग 15 वर्ष पहले धक्का बस्ती करनाल निवासी दिलावर के साथ हुई थी.
शादी के बाद उनकी दो संताने हुई. 13 वर्षीय पुत्र सुशील और 10 वर्षीय पुत्री सोनम.
शादी के लगभग 5-6 वर्षों बाद पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़े होने
लगे थे. झगड़े की वजह किया रही थी यह बता पाना मुश्किल है. धीरे-धीरे नौबत यहाँ तक
आगई कि दोनों का एक साथ रहना सम्भव नहीं रहा और आज से लगभग 8 साल पहले सन 2000 में
दोनों पति-पत्नी अलग हो गए थे. लक्ष्मी ने करनाल के थाना सदर क्षेत्र में रघुनाथ
मन्दिर के पास किराये का मकान लेकर अलग रहना शुरू कर दिया था. सुशील और सोनम दोनों
बच्चे अपने पिता और दादी के पास धक्का बस्ती में ही रहते थे. धक्का बस्ती जाकर
लक्ष्मी को पता चला कि सोनम वहां नहीं आई थी. सोनम ना घर पर थी और ना दादा-दादी के
पास तो आखिर वह गई कहा.? इस मामले में लक्ष्मी ने अब और समय व्यर्थ करना उचित नहीं
समझा और समझदारी दिखाते हुए दिनांक 16 को थाना सदर अंतर्गत आती पुलिस चौकी की में
जाकर सोनम के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. नाबालिक सोनम चौथी कक्षा की
छात्रा थी, इसलिए मामले की गम्भीरता को देखते हुए चौकी इंचार्ज ने थाना सदर एसएचओ
मनोज को इस बात की सूचना देने के पश्चात सोनम की तलाश शुरू कर दी थी. सोनम को
तलाशने में सदर थाना पुलिस ने हर संभव प्रयास किया था. लेकिन सोनम के लापता होने
के 15 दिन बीत जाने के बाद भी वह सोनम को तलाशने में असफल रही थी.
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| पुलिस हिरासत में आरोपी |
इस बीच लक्ष्मी
ने पुलिस के सामने अपनी शंका व्यक्त की कि शायद सोनम के लापता होने के पीछे उसकी
दादी और पिता का हाथ हो सकता है. पुलिस इस मामले में अभी छानबीन कर ही रही थी कि
दिनांक-29 फरवरी को पश्चमी यमुना नहर में हांसी रोड कच्छवा पुल के पास प्लास्टिक
के कट्टे में बंद एक लावारिस लाश पड़ी मिली थी. लाश को वहां पर खेल रहे कुछ बच्चों
ने देखा था. उन्होंनें ही शोर मचाकर लोगों को इकट्ठा किया था और फिर पुलिस को
सूचना दी गई थी.
लापता होने की रिपोर्ट और पुलिस तहकीकात
सूचना मिलते ही थाना
सिटी करनाल इंचार्ज इं हरजिंदर सिंह दलबल सहित घटनास्थल यमुना नहर पर पहुँच गए थे.
पुलिसकर्मीयों की मदद से कट्टे को खोलकर देखा गया. लाश किसी नाबालिग बच्ची की थी
जो काफी हद तक सड़ चुकी थी. अनुमान लगाया गया कि लाश काफी दिनों से वहां पड़ी हो
सकती थी. इं हरजिन्दर सिंह ने क्राईम टीम सहित एफएसएल की टीम को भी मौका पर बुला
लिया गया था. लाश के पंचनामा की वीडियोग्राफी कर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का
मुकदमा अपराध संख्या-049/2019 पर हत्या की धरा 302 के अंतर्गत दर्ज कर बाडी को
पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दिया. लावारिस लाश किसकी थी,? उसकी
शिनाख्त करना सबसे अहम् काम था. तभी जाकर हत्या और हत्या के कारणों तक पहुंचा जा
सकता था. सो इं हरजिन्दर सिंह ने लाश की शिनाख्त के लिए मृतका के पोस्टर बनवाकर
शहर के सार्वजनिक स्थानों पर लगवा कर शिनाख्त की अपील की. इस के आलावा उन्होंने
करनाल सहित आसपास क्षेत्रों के थानों से पिछले महीने की दर्ज मिसिंग लोगों की
रिपोर्ट मंगवा ली.
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| इंस्पेक्टर हरजिंदर सिंह और सहायक |
इस बीच पोस्टमार्टम
की रिपोर्ट आ गई थी. रिपोर्ट के अनुसार मृतका बच्ची की उम्र 8 से लेकर 10 वर्ष के
बीच थी और उसकी हत्या किसी चीज से गला दबाकर की गई थी. शिनाख्त छिपाने के लिए उसके
चेहरे को जलाने की भी कोशिश की गई थी. हत्या लगभग 17-18 दिन पहले की गई थी. इं
हरजिन्दर सिंह ने जब पिछले महीने के लापता लोगों की जब लिस्ट खंगाली तो एक मिसिंग
रिपोर्ट पर उनकी नज़र ठहर गई. यह थाना सदर क्षेत्र से लापता हुई एक सोनम नामक 10
वर्षीय बच्ची का मामला था जो अभी तक अंट्रेस था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार
लावारिस मिली लाश मे मृतका की आयु भी लगभग 10 वर्ष थी, सो इं हरजिंदर सिंह ने थाना
सदर पुलिस से फाईल मंगवाकर जांच शुरू कर दी. सोनम की गुमशुदगी उसकी माँ लक्ष्मी ने
दर्ज करवाई थी. इं हरजिंदर सिंह ने लक्ष्मी को मोर्चरी में बुलवाकर लाश की जब
शिनाख्त करवाई तो उसने लाश पहचानते हुए बताया कि वह उसी की लापता बेटी सोनम की लाश
थी. पूछताछ के दौरान लक्ष्मी ने बताया कि सोनम के स्कूल की उन दिनों छुटियाँ थी,
उसके स्कूल 15 तारीख़ को खुलने थे इसलिए कुछ दिन अपनी मौसी के घर रहने के बाद वह
उसके घर रहने आई थी जहाँ से वह लापता हो गई थी. लक्ष्मी ने यह भी बताया कि उसकी
किसी से दुश्मनी या कोई लेने-देने का झगड़ा नहीं है, हाँ इस मामले में उसने अपने
पति दिलावर पर अपना शक जताया था. उसका पिता दिलावर अपनी ही बेटी की हत्या क्यों
करेगा,? इस बारे में वह कुछ नहीं बता पाई थी फिर भी इं हरजिंदर सिंह ने दिलावर को
थाने बुलवाकर पूछताछ की पर वह निर्दोष साबित हुआ. उसका इस मामले से कोई लेनादेना
नहीं था.
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| एसपी सिटी करनाल |
इं हरजिंदर सिंह ने लक्ष्मी की ससुराल धक्का बस्ती और हालमें जहाँ वह रहती थी
के आसपड़ोस से पूछताछ करवाई तो कई चौंकाने वाली बातें पता चली. उन्होंने लक्ष्मी
में दोबारा पूछताछ करने के बाद सोनम की गुमशुदगी में दर्ज बयानों और उसके द्वारा
दिए बयानों का बारीकी से निरिक्षण किया तो उन में काफी अंतर था. इसके आलावा
लक्ष्मी बार-बार अपना ब्यान भी बदलती रही थी. इं हरजिंदर को साफ लग रहा था कि सोनम
के मामले में लक्ष्मी का कहीं न कहीं कोई हाथ जरूर है पर उनके पास कोई पुख्ता सबूत
ना होने के कारण उन्होंने उससे अभी कुछ कहना उचित नहीं समझा. इस दौरान
पुलिसकर्मी लक्ष्मी पर बराबर अपनी नजर रखे हुए थे.
पुलिस कैसे पहुंची हत्यारों तक
इं हरजिंदर ने
लक्ष्मी के घर के पास के सारे सीसीटीवी फुटेज निकलवा कर जब चेक किये तो दिनांक 10
जनवरी के फुटेज में लक्ष्मी किसी युवक के साथ बाईक पर एक कट्टा रख कहीं जाती हुई
नज़र आई, उन्होंने लाश से बरामद कट्टा और बाईक पर लेजाने वाला कट्टा चेक किया तो
दोनों कट्टों पर एक ही मार्का लगा हुआ था. सोनम की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना सदर
में लक्ष्मी ने दिनांक-16 जनवरी को दर्ज करवाई थी और फुटेज में वह 10 जनवरी की रात
कट्टा लेकर जाती दिखाई दी थी जबकि यमुना नहर से कट्टे में बंद लाश 29 फरवरी को इन
दोनों घटनाओं के 18 दिन बाद बरामद की गई थी. तो क्या सोनम की हत्या 10 जनवरी को
करने के बाद 16 तारीख को उसके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी. अब शक की
कोई गुंजायश नहीं रही थी. इं हरजिंदर सिंह ने लक्ष्मी को हिरासत में लेकर जब
पूछताछ तो वह तरह-तरह की कहानियां सुनाने लगी. जब उसे लेडी कांस्टेबल के हवाले
किया गया तो उसने अपनी ज़ुबान खोलते हुए बताया कि उसी ने अपने प्रेमी अमित के साथ
मिलकर सोनम की हत्या की थी. लक्ष्मी की निशानदेही पर सदर बाज़ार निवासी उसके प्रेमी
अमित को भी गिरफ्तार कर दिनांक 1 फरवरी को अदालत में पेश कर दो दिनों के पुलिस
रिमांड पर ले लिया. रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में सोनम के लापता होने से लेकर
उसकी हत्या होने की कहानी इस प्रकार है.
लक्ष्मी के अवैध सम्बन्धऔर सोनम की हत्या का रहस्य
आठ वर्ष पहले अपने पति
से अलग होने के बाद लक्ष्मी ने सदर बज़ार के रघुनाथ मंदिर के पास किराये के मकान
में जब रहना शुरू तब उसकी मुलाकात अमित नामक व्यक्ति से हुई. अमित भी उसी मोहल्ले
का रहने वाला था. वह शादीशुदा था और उसके तीन बच्चे भी थे. अमित का छोटा सा
ठेकेदारी का काम था. वह बीमार मरीजों की देखभाल के लिए काम वालियां उपलब्ध करवाया
करता था .लक्ष्मी को भी उसीने काम पर लगवाया था, इसी कारण उसका लक्ष्मी के घर
आना-जाना बन गया था. लक्ष्मी अपने पति से अलग अकेली रहती थी, उसे भी किसी सहारे,
खासकर पुरुष के सहारे की जरूरत थी. सो दोनों के बीच पहले दोस्ती बनी और फिर जल्दी ही
वह रिश्ता बन गया जिसे हमारे समाज में नाजायज़ कहा जाता है. अमित लक्ष्मी की
शारीरिक जरूरतों के अलावा वह सब जरूरतें पूरी करने लगा जिसकी लक्ष्मी ने तमन्ना की
थी. दोनों के बीच सब ठीकठाक ही चल रहा था. किसी को इस बात की भनक तक ना थी.
सोनम की हत्या,क्यों-कैसे
दिनांक 10 जनवरी के
दिन लक्ष्मी का मालिक मकान वैष्णों देवी की यात्रा पर जम्मू गया हुआ था और उन
दिनों लक्ष्मी की बेटी सोनम स्कूल की छुट्टियाँ होने के कारण अपनी माँ के घर रहने
आई हुई थी. उसी शाम अमित भी लक्ष्मी को मिलने उसके घर आ पहुंचा था. अमित को आया
देख लक्ष्मी ने सोनम को कुछ पैसे देते हुए कहा की वह बाज़ार जाकर घूमफिर आये. सोनम
बड़ी समझदार और होशियार बच्ची थी. अमित के आते माँ का इस तरह अचानक उसे बज़ार भेजना
समझ ना आया. वह माँ से पैसे लेकर कमरे से बाहर तो निकल आई पर बाज़ार जाने की बजाय
वह छत पर चली गई, कुछ समय बाद जब वापिस नीचे आकर उसने देखा तो पाया कि मकान का
मुख्य द्वार बंद पाया था और माँ जिस कमरे में थी उसमें से माँ और अमित के हंसने-
खिलखिलाने की आवाजें आ रही थी. लक्ष्मी के कमरे का दरवाज़ा खुला हुआ था. क्योंकि
सोनम को बाज़ार भेजने के बाद लक्ष्मी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह बाज़ार नहीं
गई थी. बेपरवाही से वे दोनों अपनी हवस का खेल,खेल रहे थे की अचानक से सोनम ने कमरे
में प्रवेश कर उन्हें चौंका दिया था. दोनों की चोरी रंगे हाथों पकड़ी गई थी. उनका
भंडा फूट चूका था और वे दोनों बुरी तरह से डर गये थे. सोनम ने अपनी माँ लक्ष्मी को
धमकी देते हुए कहा था.
‘’ तुम्हारी इस
करतूत को मैं पापा और दादी को बताउंगी कि उनसे अलग रहकर तुम यहाँ क्या गुल खिला
रही हो.’’
अमित और लक्ष्मी ने
सोनम को अपने विश्वास में लेकर काफी समझाने का प्रयास किया और उसे रुपयों का लालच
भी दिया. पर सोनम अपनी बात पर अड़ी रही थी. सोनम की जिद को देखते हुए और समाज के डर
से बचने के लिए उन दोनों ने सोनम को ही हमेशा के लिए चुप कर देने का फैसला लेते
हुए उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी. उसी के पहने स्वेटर को उतार कर उसके गले में
कस दिया गया था.
सोनम की हत्या करने
के पश्चात अमित बाहर जाकर दुकान से बड़ा सा खाली कट्टा खरीद लाया और दोनों ने कट्टे
में सोनम की लाश को भरकर बाईक द्वारा यमुना नदी में फेंक दिया था. जिस समय
उन्होंने लाश फेंकी थी उस समय नहर में पानी था. उन्होंने सोचा था कि लाश पानी में
बहकर दूर चली जाएगी पर अगले दिन ही नहर में पानी का बहाव कम हो गया था और लाश कुछ
आगे जाकर रुक गई थी और पूरे 19 दिन तक एक ही जगह पर पड़ी रही थी. सोनम की लस्क
ठिकाने लगाने के एक सप्ताह बाद लक्ष्मी ने सोनम की गुमशुदगी थाने में इस लिए दर्ज
करवाई थी कि उसके स्कूल की छुट्टियाँ खत्म होने वाली थी. सोनम के स्कूल ना जाने के
कारण लोग उससे पूछ सकते थे इसलिए उसने सोनम के लापता होने की रिपोर्ट लिखवाकर यह
ड्रामा रचा था जिसे इं हरजिंदर सिंह अपनी सूझबूझ से नाकाम कर दिया था.
रिमांड अवधि समाप्त
होने के बाद अमित और लक्ष्मी को सोनम की हत्या के आरोप में पुनः अदालत में पेशकर
जिला जेल भेज दिया गया.
( पुलिस सूत्रों पर
आधारित कथा )
-साहिल कपूर





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