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| जगजीत सिंह और रविंदर कौर की शादी का फोटो |
यह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. घर की करोड़ों की दौलत ठुकराकर एक व्यक्ति घर से भागकर पत्नी को फंसाने के लिए ढाबे पर बर्तन धोने का काम करने लगा. वह भी पिछले 11 वर्ष से. इस बात की किसी को कानोंकान खबर तक नहीं लगी कि जो व्यक्ति बर्तन धो रहा है वह एक बड़़े धनाड्ढ परिवार का है. मामला तब खुला जब पति की हत्या का आरोप झेल रही पत्नी ने थाना लांबड़ा के एसएचओ सब इंस्पेक्टर पुष्प बाली की सहयता से उसे ढूंढ निकाला. पुलिस के सामने उसने कुबूल किया कि वह महिला का पति है और उसने यह सब पत्नी को फंसाने के लिए किया था.
कहानी फ़िल्मी जरूर लगती है पर है हकीकत. क्या ऐसा
भी हो सकता है कि एक करोड़पति इंसान सिर्फ इसलिए अपने घर से लापता हो जाये कि वह
अपनी पत्नी और उसके परिवार को सबक सिखा सके.? यह अजीबोगरीब मामला भी कुछ ऐसा ही
है.
पंजाब में काले दौर
के समय बहुत बड़ी तादात में लोग अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए पंजाब से पलायन कर
देश के अन्य शहरों में जाकर बस गये थे जिन में अधिकांश व्यापारी तबके के लोग शामिल
थे. सरदार मंजीत सिंह बग्गा, जिनका कपड़े का बहुत बड़ा कारोबार था. वे भी अपना
कारोबार समेटकर पंजाब छोड़ अपनी बीवी बच्चों सहित उत्तर प्रदेश के जिला राय बरेली
में आकर बस गये थे. राय बरेली के गुरु नानक नगर में कोठी नम्बर-13 लेकर उन्होंने
रिहायश बनाकर अपना कपड़े का काम वहीँ शुरू कर दिया था. उनके पास अधिकांश ग्राहक
यूपी, बिहार और महाराष्ट्र के थे. सो ग्राहकों को उनके पंजाब से रायबरेली आने से
कोई फर्क नहीं पड़ा था. बल्कि उन्हें सहूलियत मिल गई थी. देखते-देखते ही मंजीत सिंह
बग्गा का धंधा पंजाब से भी अधिक चल निकला था.
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| रविंदर कौर का ताज़ा फोटो |
मंजीत सिंह के
परिवार में पत्नी के अलावा उनके दो पुत्र थे. बड़ा बेटा जगजीत सिंह बग्गा उर्फ़ सोनू
तथा सुरजीत बग्गा. बड़े होने के बाद दोनों बेटे अपनी-अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद
अपने पिता के कपड़े के कारोबार में शामिल हो गये थे. उन्होंने गारमेंट कपड़ो के लिए
फैक्ट्री भी लगा ली थी जिसकी देखभाल जगजीत सिंह किया करता था. कारोबार और परिवार
जब पूरी तरह से सेट हो गये तो मंजीत सिंह ने 14 अक्टूबर 2001 को अपने बड़े बेटे
जगजीत सिंह की शादी साहिब गंज फैजाबाद निवासी जसवंत सिंह की पुत्री रविंदर कौर के
साथ कर दी थी. शादी के बाद कुछ समय तक दोनों पति-पत्नी बड़े खुश थे. जगजीत आम लोगों
की तरह घर में बैठकर दो-चार पेग शराब जरूर पीता था, पर शराब को लेकर उनका आपस में
कभी झगड़ा नहीं हुआ था. उन के घर दो बेटों ने जन्म लिया. जिनके नाम हरप्रीत सिंह और
हरमीत सिंह रखे गये थे. बेटों के जन्म के बाद अपने काम की व्यस्तता के कारण या
किन्हीं अन्य वजह से दोनों पति-पत्नी एक दूसरे को समय नहीं दे पा रहे थे, जिस कारण
दोनों के बीच झगड़ा रहने लगा था. शुरू में तो तो यह बात मामूली कहासुनी से शुरू हुई
थी, जैसा की हर घर में होता है. पर कुछ ही महीनों में जगजीत सिंह और रविंदर कौर के
बीच के डिफरेंशन इतने ज्यादा बढ़ गये कि दोनों ने एक-दूसरे से बात तक करना बंद कर
दिया था.
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| जगजीत सिंह का ताज़ा फोटो |
जगजीत सिंह के पिता मंजीत सिंह ने और रविंदर कौर के पिता जसवंत सिंह ने
भी दोनों को काफी समझाया पर उनके बीच का क्लेश कम होने की बजाय बढ़ता ही गया था.
रोज-रोज के क्लेश से दुखी होकर अंत में मंजीत सिंह ने अपने बेटे जगजीत सिंह और बहु
रविंदर कौर को घर से अलग कर दिया था. अब जगजीत
किराये पर मकान लेकर अपनी बीवी बच्चों के साथ रहने लगा था और पिता की
फैक्ट्री में काम करता था. जगजीत के घर का सारा खर्च उसका पिता मंजीत सिंह देता
था. पति-पत्नी के बीच बातचीत अब भी बंद थी. बाद में दोनों के बीच झगड़ा इतना बढ़ गया
कि रविंदर कौर अपने दोनों बच्चे लेकर अपने मायके फैजाबाद रहने चली गई. यह 2009 की
बात है. बाद में जगजीत भी अपनी पत्नी के पास आकर किराये के मकान में रहने लगा था.
रविंदर कौर के अलग
हो जाने पर मंजीत सिंह ने बच्चों की परवरिश के लिए खर्चा देना बंद कर दिया तब रविंदर
कौर ने न्यायालय की शरण ली और साल 2009 में अपने पति जगजीत सिंह बग्गा और उसके
परिवार पर जिला अयोध्या फैजाबाद की फैमली कोर्ट में धारा 125 पर खर्चे का मुकदमा
दायर कर दिया. जिसे माननीय सत प्रकाश की अदालत ने मकदमा नम्बर 104/9 पर रविंदर की
याचिका मंजूर कर उस पर सुनवाई शुरू कर दी थी. रविंदर कौर ने अपनी याचिका में लिखा
था कि मेरे परिवार को मेरे ससुर मनजीत सिंह ने खर्चा देना बंद कर दिया है. मेरे
छोटे-छोटे दो बच्चे हैं और मै किराये के घर में रहती हूँ. और बच्चों को पालने में असमर्थ
हूँ.
यह मुकदमा अभी चल ही
रहा था कि अचानक एक दिन रविंदर कौर की जिन्दगी में एक ऐसा तूफान आया जिसने उसके
साथ उसके माता-पिता के परिवार को भी बिखेर कर रख दिया था.
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| थाना लाम्बरा प्रभारी पुष्प बाली , रविंदर कौर, जगजीत सिंह और वकील विजय शंकर |
सुबह अपनी फैक्ट्री
गया जगजीत शाम को जब वापिस घर नहीं लौटा था. ऐसे में सब का चिंतित होना स्वभाविक
था. देर रात तक इंतज़ार करने के बाद रविंदर कौर ने यह बात फोन द्वारा अपने ससुर
मंजीत सिंह को बताई. रविंदर और उसके बच्चों को तो उसकी चिंता थी ही पर सबसे अधिक
चिंतित उसके माता-पिता थे. मंजीत सिंह अपने बेटे जगजीत से बहुत प्यार करते थे.
बहरहाल जगजीत के यारों दोस्तों के अलावा उन सभी ठिकानो पर उसकी तलाश की गई जहां
उसके होने की सम्भावना हो सकती थी. रिश्तेदारों में भी पता किया गया. जब कहीं से
जगजीत के ना होने की खबर मिली तो मंजीत सिंह बग्गा ने अपने बेटे जगजीत के लापता
होने की रिपोर्ट थाना कोतवाली रायबरेली में दर्ज करवा दी थी. मामला एक ऐसे धनाड्य
परिवार के व्यापारी से जुड़ा हुआ था जिनकी शहर में काफी साख थी और ऊपर तक पहंच थी.
सो पुलिस ने सबसे पहले जगजीत का फोटो लेकर प्रदेश के सभी थानों में सर्कुलेट करवा
दिया. उसके बाद उसके मोबाईल फोन को चेक किया गया तो पता चला कि जगजीत का फोन घर पर
ही बज रहा था. पूछने पर रविंदर कौर ने बताया कि जगजीत उसदिन अपना फोन घर पर ही छोड़
गये थे. इस पर पुलिस ने अनुमान लगाया कि एक सफल व्यापारी अपना फोन गलती से भी घर
नहीं भूल सकता. पुलिस ने इस बात के दो अर्थ लगाये कि या तो जगजीत अपनी मर्जी से कहीं
गायब हो गया है या फिर घर की चार दीवारी के भीतर कुछ और ही खिचड़ी पकी थी, जिसकी
सुगंध अभी तक बाहर नहीं आई थी. क्योंकि पति-पत्नी के बीच झगड़ा था इस बात का पता
पुलिस को तफ्तीश के दौरान लग गया था. बहरहाल पुलिस ने जगजीत का फोन नम्बर
सर्विलांस पर लगवा दिया था. उच्च अधिकारीयों के दबाव के कारण थाना कोतवाली पुलिस
ने जगजीत की तलाश में दिन-रात एक कर दिया था. मुखबिरों की भी सहायता ली गई और
रविंदर कौर से भी कई बार बारीकी से पूछताछ की गई थी पर जगजीत का कहीं कोई सुराग
नहीं लगा था. जगजीत की तलाश करने में अब तक पुलिस ने कई जाँच एजेंसियों का सहारा
लिया था पर नतीजा शून्य निकला. अब तो पुलिस को भी संदेह होने लगा था कि जगजीत के
साथ घर के भीतर ही कोई हादसा हुआ था. शायद उसकी हत्या कर दी गई थी. रविंदर कौर पर
पुलिस के साथ-साथ उसके ससुर मंजीत सिंह बग्गा का दबाव बढ़ने लगा था. जबकि रविंदर
कौर की समझ में नहीं आ रहा था कि वह इन हालतों का सामना कैसे करे. उसका अपना दिल
यह बात मानने को तैयार ही नहीं था कि जगजीत के साथ कोई हादसा हो सकता है. आखिर
अपने ससुर और पुलिस की परवाह ना करते हुए रविंदर कौर ने थाना कोतवाली पुलिस से
लेकर डीएसपी, एसपी, आईजी, डीजीपी, जिलाधीश और राज्य के मुख्यमंत्री तक को दरखास्ते
लिख-लिख इस बात की गुहार लगाई कि उसने या उसके परिवार ने जगजीत का ना अपहरण किया है ना ही उसकी हत्या
हुई है. अगर वह लापता है तो अपनी मर्जी से कहीं गायब हो गया है या फिर मेरे पति
जगजीत सिंह को गायब करने में मेरे ससुर मंजीत सिंह का हाथ हो सकता है.
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| जगजीत सिंह का पुराना फोटो |
जगजीत को लापता हुए
जब दो साल हो गए और उसका ना तो कोई सुराग लगा ना उसका या उसके बारे में जब कहीं से
कोई फोन नहीं आया तो मंजीत सिंह बग्गा ने अपनी बहु रविंदर कौर पर सीधे आरोप लगाते
हुए कहा कि तुमने ही अपने पिता जसवंत सिंह, भाई तनप्रीत सिंह और
रविंदर कौर के फूफा प्रोफेसर हर्षत सिंह के साथ मिलकर जगजीत का अपहरण करवा कर उसकी
हत्या करवाकर उसकी लाश कहीं खुर्दबुर्द कर दी है. मंजीत सिंह बग्गा ने रायबरेली की
अदालत में जगजीत सिंह बग्गा के अपहरण और मर्डर का कंप्लेंट केस रविंदर कौर उसके पिता
जसवंत सिंह, भाई तनप्रीत सिंह और शादी करवाने वाले बिचौलिए प्रोफेसर
हर्षत सिंह पर दायर कर दिया था. यह केस 6 जून 2012 को दायर किया गया था. इस मामले में चारों
आरोपियों को अदालत में पेश होना पड़ा और जमानते करवानी पड़ी थी. रायबरेली की अदालत
में जब इस केस ट्रायल शुरू हुआ तो रविंदर कौर ने अपने साथ अन्य आरोपियों को
निर्दोष बताते हुए अदालत को बताया कि उसका पति जगजीत सिंह जिन्दा है और लापता है
जिसे पुलिस ढूंढ़ने में नाकाम रही है. इस मामले की सीबीआई जाँच करवाई जाये ताकि सच
सबके सामने आ सके. अदालत ने रविंदर कौर की यह दरखास्त खरिज कर दी और मुक़दमे की
सुनवाई जारी रखी.
रविंदर कौर बार-बार
अपने पति जगजीत सिंह के जिन्दा होने का दावा ऐसे ही नहीं कर रही थी. दरअसल दो वर्ष
पहले से उसे अलग-अलग नम्बरों से गुमनाम फोन आते थे. फोनकर्ता अपना नाम बताये बिना
केवल परिवार के सदस्यों का हालचाल जानना चाहता था. फोनकर्ता ने कभी अपना नाम नहीं
बताया था, पर रविंदर कौर उस आवाज़ को अच्छी तरह से पहचानती थी. वह आवाज़ जगजीत सिंह
की थी. रविंदर ने यह बात कोतवाली पुलिस और आला अफसरों को भी बताई थी और वह फोन
नम्बर भी दिया था जिन नम्बरों से उसे फोन आते थे. पुलिस ने उन नम्बरों को ट्रेक कर
जब पता लगाया तो मालूम पड़ा कि वह नम्बर किन्ही ट्रक ड्राइवरों के थे, जो अलग-अलग
राज्यों बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र आदि के रहने वाले थे. पूछताछ में उन्होंने बताया
कि जगजीत सिंह नामक किसी व्यक्ति से उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था.
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| एस एच ओ थाना लाम्बरा पुष्प बाली |
एक तरफ जगजीत की
तलाश भी हो रही थी और दूसरी तरफ उसी की हत्या का मुकदमा उसकी पत्नी रविंदर कौर,
उसके पिता जसवंत सिंह, भाई तनप्रीत सिंह और शादी करवाने वाले बिचौलिए प्रोफेसर
हर्षत सिंह पर चल रहा था. पिछले 10 सालों से रविंदर कौर अपने पति की हत्या के
मुकदमे का सामना कर रही थी. इस केस में अभियोजन पक्ष की ओर से कई सच्चे-झूठे गवाह
भी पेश किये गये थे. तमाम गवाहियाँ और बहस पिछले माह पूरी हो चुकी थी और फैसले की
तारीख़ माननीय अदालत ने 10 अक्टूबर 2019 तय की थी और इस मामले में रविंदर कौर को
सज़ा होना तय थी.
दिनांक 23- 9- 2019
को पंजाब के जालंधर देहात एसएसपी नवजोत सिंह माहल को फैज़ाबाद की फैमली कोर्ट से एक
फैक्स प्राप्त हुआ, जिसमें यह लिखा था कि रविंदर कौर बनाम जगजीत सिंह उर्फ़ सोनू
पुत्र मंजीत सिंह बग्गा निवासी- 13 गुरु नानक नगर, बरेली यूपी. केस नम्बर 104/9 धारा-125
में रुपये 4 लाख 32 हज़ार का कंडिशनल वारंट जारी किया गया है. आरोपी जालंधर देहात
क्षेत्र में कहीं छुपा बैठा है. तत्काल प्रभाव से उसे अरेस्ट कर फैजाबाद की अदालत
में पेश किया जाये. दरअसल फैजाबाद की अदालत में जज के सामने केस की बहस के दौरान
रविंदर कौर के एडवोकेट विजय शंकर पाण्डेय ने कहा था कि जगजीत सिंह जिंदा है और वह
जालंधर में किसी स्थान पर छुपा बैठा है. इसके बाद यूपी फैजाबाद की अदालत ने जालंधर
देहात के एसएसपी नवजोत सिंह माहल को रविंदर कौर के पति जगजीत बग्गा को ढूंढने का
आदेश फैक्स द्वारा दिया था.
उक्त फैक्स मिलने के
बाद एसएसपी नवजोत सिंह माहल ने जालंधर देहाती क्षेत्र के थाना लांबड़ा के एसएचओ सब
इंस्पेक्टर पुष्प बाली को उक्त फैक्स देते हुए आरोपी को शीघ्र तलाश कर अरेस्ट करने
के आदेश दिए. एसआई पुष्प बाली को यह आदेश दिनांक 24-9-2019 को प्राप्त हुए और उसी
दिन से उन्होंने अर्रोपी की तलाश शुरू कर दी. दिनांक 25 सितम्बर को रविंदर कौर
थाना लांबड़ा पहुंची और एसआई पुष्प बाली से मिलकर उसने अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए
प्रार्थना की कि यदि उसके पति जगजीत को शीघ्र ना ढूंढ़ा गया तो आने वाली 10 अक्टूबर
को निर्दोष होते हुए भी अपने पति की हत्या के अपराध में उसे और उसके परिवार को जेल
जाना पड़ेगा. रविंदर कौर ने पुष्प बाली को अपने पति जगजीत के लापता होने का शुरू से
अंत तक का सारा मामला समझाया. और वह फोन नम्बर भी दिया जिससे कुछ दिन पहले उसे
जालन्धर से अपने पति का फोन आया था. एसआई पुष्प बाली ने उक्त फोन नम्बर की डिटेल और
लोकेशन निकलवाकर चेक की. वह फोन किसी ऑटो वाले का था. आटोवाले को बुलाकर जब पूछताछ
की गई तो उसने बताया.
‘’ साहब गांव सिंघा
में हरनेक ढाबे पर काम करने वाले आदमी ने उससे फोन मांगा था और कॉल की थी.’’
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| फैजाबाद अदालत के आदेश और जगजीत का नया और पुराना फोटो |
पुष्प बाली ने समय
व्यर्थ ना करते हुए हरनेक ढाबे पर जाकर जगजीत को अरेस्ट कर रविंदर कौर के सामने ला
खड़ा कर दिया. अपने सामने अपने पति को देख रविंदर कौर एकाएक पहचान ही नहीं पायी थी.
क्योंकि जगजीत 11 साल पहले जब घर से लापता हुआ था तब उसके सिर पर बाल और पगड़ी थी
और वह बड़ा तंदरुस्त व्यक्ति था. लेकिन सामने खड़ा हुआ जीर्ण श्रीढ़ मोना व्यक्ति
किसी भी रूप में उसका पति नहीं लग रहा था. काफी देर तक दोनों मौन धारे खड़े एक दूसरे
को देखते रहे थे. यह द्रश्य किसी की भी आत्मा को झकझोड़ देने वाला था. अंत में
जगजीत ने रविंदर कौर को पुकारा.
‘’ सोनी.’’
सामने खड़े व्यक्ति
के मुख से यह शब्द सुनते ही रविंदर कौर के सब्र का बांध टूट गया और वह फूट-फूट कर
रोते हुए जगजीत से लिपट गई.
जब रविंदर और जगजीत
की शादी हुई थी तब वह हनीमून मनाने शिमला गये थे और प्यार से जगजीत ने रविंदर कौर
का नाम सोनी रखा था और अपनी बाजु पर सोनू और सोनी गुदवाया था. पुरानी यादें एकबार
फिर से ताज़ा हो गई थी. पति मिल जाने के बाद रविंदर कौर ने थाने से ही फोन कर जगजीत
की बात अपने बेटों हरप्रीत बग्गा और हरमीत बग्गा से करवाई. बेटों की आवाज़ सुनकर
जगजीत काफी भावुक हो गया था. जिस समय उसने घर छोड़ा था तब हरप्रीत 5 साल का था जो
अब 17 साल का गबरू जवान हो गया था. इस मामले को हल करने में थाना प्रभारी पुष्प
बाली को इतनी ख़ुशी और आत्म संतोष मिला जितना आज तक उन्हें अपनी पूरी नौकरी के
दौरान नहीं मिला था. दो बिछड़े हुओं को मिलाना और 4 निर्दोषों को सज़ा से बचाना.
वैसे तो इस मामले में एसआई पुष्प बाली का कोई वास्ता नहीं था. उनका काम सिर्फ इतना
था कि वे अदालत के आदेश को मानकर जगजीत को तलाश कर उसे फैजाबाद की अदालत तक
पहुंचाए. पर मामला इतना दिलचस्प था कि उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जगजीत और रविंदर
कौर से पूछताछ की. पूछताछ में जो कहानी सामने आई वह कम चौंका देने वाली नहीं थी.
गुरुनानक नगर, थाना कोतवाली, बरेली, यूपी में करोड़ों का मालिक जगजीत सिंह बग्गा उर्फ़
सोनू सिर्फ अपनी पत्नी को फंसाने के लिए ढाबे पर बर्तन साफ रहा था. सोनू के पिता
का वहां पर कपड़े का बड़ा कारोबार है. खुद की
फैक्ट्री भी लगाई हुई है और वहां पर वह ऐश की जिन्दगी जीता था. शादी के कुछ सालों
बाद पत्नी के साथ विवाद शुरू हुआ तो उससे तलाक मांगा. पत्नी ने तलाक देने से मना
कर दिया तो वो वहां से भागकर जालंधर आ गया और थाना लांबड़ा अंतर्गत के मुद्दा गांव
में एक ढाबे पर बर्तन मांजने की नौकरी करने लगा. तीन साल तक मुद्दा गांव में ढाबे
पर काम करने के बाद वो वह नौकरी छोड़ गांव सिंघा में हरनेक ढाबे पर बर्तन मांजने का
काम करने लगा. ढाबे पर उसे चार हजार रुपये पगार के साथ-साथ खाना और कपड़े मिल रहे
थे, जिससे वो गुजारा कर रहा था.
जांच में सामने आया
कि सोनू के परिजनों को पता था कि वो जालंधर, लांबड़ा के सिंघा
गांव में है. उसने अपने परिवार से अपनी बदहाली की बात कभी नहीं बताई थी कि कहीं घर
वाले आर्थिक मदद न भेज दें और वह फंस जाए. यहां तक कि वह अपने पिता या परिवार से जब भी बात करता तो
रिश्तेदारों के फोन के जरिए ही करता था. उसे डर था कि कहीं परिवार के फोन को पुलिस
ट्रैप पर न लगा दे और वह पकड़ा जाये.
जगजीत कुछ महीने
पहले से अपनी पत्नी रविंदर कौर को अलग-अलग नम्बरों से फोन कर कहा था. ढाबे पर आने
वाले ट्रक ड्राइवरों से वह फोन मांग लिया करता था. इसी लिए पुलिस उसका फोन ट्रेक
नहीं कर पाई थी. आखरी काल उसने एक ऑटो वाले के फोन से की थी, जिससे वह पकड़ में आ
गया था. आखरी काल में जगजीत ने रविंदर कौर से कहा था.
‘वह क्यों मेरे घरवालों
को बिना वजह तंग कर रही है. वह जिंदा है और कहां है यह वो नहीं बताएगा, दम है तो ढूंढकर दिखाए. मुझे तुम तो क्या, तुम्हारा बाप भी नहीं पकड़ा सकता.’
यह फोन उसने तब किया
था जब उसे इस बात का पता चला था कि रविंदर कौर ने उसके और उसके परिवार पर जो खर्चे
का केस डाल रखा था वह जीत गई है और अब उसके पिता को अदालत में साढ़े चार लाख रुपये
जमा करने पड़ेंगे.
जगजीत के मिल जाने
के बाद जालंधर के एसएसपी माहल ने इसकी जानकारी यूपी फैजाबाद की अदालत को दी.
फैजाबाद अदालत की तरफ से ई-मेल स्थानीय एसएसपी माहल को आया कि वह पुलिस कस्टडी में
पूरी सुरक्षा के साथ जगजीत सिंह व रविंदर कौर को फैजाबाद अदालत में पेश करें, इसका पूरा खर्च अदालत वहन करेगी. थाने ने कागजी
करवाई पूरी करने के बाद दिनांक 28-9-2019 को अदालत के आदेश पर थाना लांबड़ा पुलिस जगजीत
सिंह को यूपी ले गई ताकि उसे फैमिली कोर्ट फैजाबाद में और रायबरेली की ट्रायल
कोर्ट में पेश किया जा सके.
हर अपराधी को यह
गलतफहमी होती है कि उसने जो अपराध किया है, उसे कोई पकड़ नहीं
सकता. जैसे-जैसे समय गुज़रता है वैसे ही अपराधी का आत्मविश्वास भी बढ़ने लगता है.
यही गलतफहमी जगजीत उर्फ़ सोनू को भी हो गई थी और वह गलती कर बैठा. लेकिन उसकी इस
गलती ने चार निर्दोष लोगों को जेल जाने से बचा लिया था.
( पुलिस सूत्रों पर
आधारित कथा का नाट्य रुपान्तरण)
-हरमिन्दर कपूर

















